ghanshyamsharmahindi.blogspot.com

Sunday, 21 November 2021

प्रतिदर्श प्रश्न-पत्र 1 (हिंदी - 12) सत्र - १

 साभार प्राप्त परम आदरणीया श्रीमती श्रद्धा आचार्य मैम...🙏🙏👏👏👏👏👏




केन्द्रीय विद्यालय  खुर्दा रोड

SET-1

आदर्श प्रश्न पत्र -  2021

विषय –हिन्दी  (आधार) विषय कोड (302)                                                                                                              कक्षा -बारहवीं

अवधि- 1.30 घंटे                                                        पूर्णांक- 40 अंक


सामान्य निर्देश :-

* इस प्रश्न पत्र में तीन खंड हैं |

* खंड ‘अ’ में तीस प्रश्नों में से केवल पंद्रह प्रश्नों का ही उत्तर देना है |

* खंड ‘ब’ में ‘छह’ प्रश्नों में से केवल पांच प्रश्नों का ही उत्तर देना है |

* खंड ‘स’ में ‘बाईस’ प्रश्नों में से केवल ‘बीस’ प्रश्नों का ही उत्तर देना है |

* निर्देशों को बहुत सावधानी से पढ़िए और उनका पालन कीजिए |

* इस प्रश्न पत्र में वस्तुपरक प्रश्न पूछे गए हैं |

* प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में चार विकल्प दिए गए |

* विकल्पों में से सबसे उचित का चयन सावधानीपूर्वक कीजिए | 

                                          खंड अ -अपठित बोध

 प्रश्न- निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :-          1 x 10 =10

स्त्रियों के पास एक महान शक्ति सोई हुई पड़ी है | दुनिया की आधी से बड़ी ताकत उनके पास है | आधी से बड़ी ताकत इसलिए कि स्त्रियां आधी तो हैं ही दुनिया में , आधी बड़ी इसलिए कि बच्चे – बच्चियाँ उनकी छाया में पलते हैं और वे जैसा चाहें उन बच्चे और बच्चियों को परिवर्तित कर सकती हैं | पुरुषों के हाथ में कितनी ही ताकत हो , लेकिन पुरुष एक दिन स्त्री की गोद में होता है वहीँ से वह अपनी यात्रा शुरु करता है |

एक बार स्त्री की पूरी शक्ति जाग्रत हो जाये और वे निर्णय कर लें कि किस प्रेम की दुनिया को निर्मित करेंगी जहाँ युद्ध नहीं होंगे , जहाँ हिंसा नहीं होगी , जहाँ राजनीति नहीं होगी, जहाँ राजनीतिज्ञ नहीं होंगे, जहाँ जीवन में कोई बीमारियाँ नहीं होंगी |

जहाँ भी प्रेम है, जहाँ भी करुणा है, जहाँ दया है वहां स्त्री मौजूद है | स्त्री के पास आधी से भी ज्यादा बड़ी ताकत है और वह पांच हजार वर्षों से बिल्कुल सोई पड़ी है नारी की शक्ति का उपयोग नहीं हो सका है | भविष्य में वह उपयोग हो सकता है | उपयोग होने का एक सूत्र यही है कि स्त्री यह तय कर ले कि उन्हें पुरुषों जैसा नहीं हो जाना है |

1-इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक दीजिए -

क-स्त्री – स्वभाव             ख- स्त्री – जागरण                           

ग-स्त्री की महत्ता              घ-स्त्री – स्वभाव का जागरण


2- स्त्रियों की शक्ति को सुप्त क्यों कहा गया है ?

क-वे अपने मूल स्वभाव को जान नहीं सकी |  ख-वे अपने मूल स्वभाव को जान कर उस पर चल नहीं सकी       

ग-वे स्वयं को पुरुष जैसा समझती हैं |        घ-वे स्वयं को पुरुष से हीन समझती हैं |




3 स्त्रियों में पुरुषों को बदलने की ताकत है , क्योंकि –

क-स्त्रियाँ अधिक शक्तिशाली हैं |      

ख-सभी पुरुष स्त्रियों की गोद में पलते –बढ़ते हैं 

ग-स्त्रियों में सृजन की ताकत है |    

घ-पुरुष स्त्रियों के बिना नहीं रह सकता |

4- स्त्री में कौन-से गुण प्रबल हैं ?

क- संघर्ष और साहस                          ख- नैतिकता और समझदारी

ग-प्रेम और करुणा                            घ- शांति और उन्नति 

5- मैं सोचता हूँ , स्त्रियों के पास एक महान शक्ति सोई हुई पड़ी है | वाक्य का प्रकार बताइए - 

क-सरल वाक्य   ख- मिश्र वाक्य  ग- संयुक्त वाक्य  घ-उपरोक्त में से कोई नहीं |

6- दुनिया की आधी से बड़ी ताकत किनके पास है? 

क-पुरुषों के पास     ख-स्त्रियों के पास     ग-बच्चों के पास      घ- वृद्धों के पास 

7- स्त्री कितने हजार वर्षों से सोई हुई है ?

क-चार हजार वर्षों से                            ख- पांच हजार वर्षों से  

ग-छह हजार वर्षों से                            घ- सात हजार वर्षों से 

8- गद्यांश के आधार पर बताइए कि स्त्री की मौजूदगी कहाँ-कहाँ है ?

क-जहाँ प्रेम है       ख-जहाँ करुणा है       ग- जहाँ दया है    घ-उपरोक्त सभी 

9 गद्यांश के आधार पर बताइए कि  किसकी शक्ति का अभी तक कोई उपयोग नहीं हो सका है?

क- पुरुष की     ख-नारी की      ग- देश की      घ-उपरोक्त में से कोई नहीं 

10- स्त्री – पुरुष में कौन सा समास है ?

क- बहुव्रीहि समास    ख- द्विगु समास   ग- द्वंद्व समास    घ- अव्ययीभाव समास   

                                           अथवा

एकांत ढूंढने के कई सकारात्मक कारण है | एकांत की चाह किसी घायल मन की आह भर नहीं, जो जीवन के काँटों से बिंध कर घायल हो चुका है, एकांत सिर्फ उसके लिए शरण मात्र नहीं | यह उस इंसान की ख्वाइश भर नहीं, जिसे इस संसार में फेंक दिया गया हो और वह फेंक दिए जाने की स्थिति से भयभीत होकर एकांत ढूंढ रहा हो | हम जो एकांत में होते हैं, वही वास्तव में होते हैं | एकांत हमारी चेतना की अंतर्वस्तु को पूरी तरह उघाड़ कर रख देता है |

अंग्रेजी का एक शब्द – `आइसोलोफिलिया` इसका अर्थ है अकेलेपन, एकांत से गहरा प्रेम | पर इस शब्द को गौर से समझें तो इसमें अलगाव की एक परछाई भी दिखती है | एकांत प्रेमी हमेशा ही अलगाव कि अभेद दीवारों के पीछे छिपना चाह रहा हो, यह जरूरी नहीं | एकांत की अपनी एक विशेष सुरभि है और जो भीड़ के अशिष्ट प्रपंचों में फंस चुका हो , ऐसा मन कभी इसका सौंदर्य नहीं देख सकता | एकांत और अकेलेपन में थोड़ा फर्क समझना जरुरी है | एकांतजीवी में कोई दोष या मनोमालिन्य नहीं होता । वह किसी व्यक्ति या परिस्थिति से तंग आकर एकांत की शरण में नहीं जाता । न ही आतातायी नियति के विषैले बाणों से घायल होकर वह एकांत की खोज करता है । अंग्रेजी कवि लॉर्ड बायरन ऐसे एकांत की बात करते हैं । वे कहते हैं कि ऐसा नहीं कि वे इंसान से कम प्रेम करते हैं, बस प्रकृति से ज्यादा प्रेम करते हैं । बुद्ध अपने शिष्यों से कहते हैं कि वे जंगल में विचरण करते हुए गैंडे की सींग की तरह अकेले रहें । वे कहते हैं- ' प्रत्येक जीव जन्तु के प्रति हिंसा का त्याग करते हुए किसी की भी हानि की कामना न करते हुए, अकेले चलो - फिरो, वैसे ही जैसे किसी गैंडे का सींग । हक्सले ' एकांत के धर्म' या ‘रिलीजन ऑफ सोलीट्यूड' की बात करते हैं । वे कहते हैं जो मन जितना ही अधिक शक्तिशाली और मौलिक होगा , एकांत के धर्म की तरफ उसका उतना ही अधिक झुकाव होगा । | धर्म के क्षेत्र में एकांत, अंधविश्वासों, मतों और धर्मांधता के शोर से दूर ले जाने वाला होता है । इसके अलावा एकांत धर्म और विज्ञान के क्षेत्र में नई अंतर्दृष्टियों को भी जन्म देता है । ज्यां पॉल सार्त्र इस बारे में बड़ी ही खूबसूरत बात कहते हैं । उनका कहना है- ' ईश्वर एक अनुपस्थिति है । ईश्वर है इंसान का एकांत । क्या एकांत लोग इसलिए पसंद करते हैं कि वे किसी को मित्र बनाने में असमर्थ हैं ? क्या वे सामाजिक होने की अपनी असमर्थता को छिपाने के लिए एकांत को महिमामंडित करते हैं ? वास्तव में एकात एक दुधारी तलवार की तरह है । लोग क्या कहेंगे इसका डर भी हमें अक्सर एकांत में रहने से रोकता है यह बड़ी अजीब बात है , क्योंकि जब आप वास्तव में अपने साथ या अकेले होते हैं , तभी इस दुनिया और कुदरत के साथ अपने गहरे संबंध का अहसास होता है इस संसार को और अधिक गहराई और अधिक समानुभूति के साथ प्रेम करके ही हम अपने दुखदाई अकेलेपन से बाहर हो सकते हैं ।

11- उपरोक्त गद्यांश किस विषय वस्तु पर आधारित है |

(क.)  अकेलेपन पर       (ख)  एकांत पर       (ग)  जीवन पर     (घ) अध्यात्म पर 

12- एकांत हमारे जीवन के लिए क्यों आवश्यक है?

 (क.)  परेशानी से भागने के लिए                (ख.) आध्यात्मिक चिंतन के लिए 

( ग.)  स्वयं को जानने के लिए                  (घ) अशांत मन को शांत करने के लिए

13- बायरन मनुष्य से अधिक प्रकृति से प्रेम क्यों करते थे?

(क)  प्रकृति की सुंदरता के कारण               (ख)  मनुष्य से घृणा के कारण 

(ग) एकांत प्रेम के कारण                       (घ) अकेलेपन के कारण

14- दुखद अकेलेपन से कैसे बाहर आया जा सकता है?                                                      (क) संसार से प्रेम करके                    (ख) सच्चे दोस्त बनाकर

 (ग) संसार की वास्तविकता को समझ कर      (घ) संसार से मुक्त होकर 

15 एकांत की खुशबू को कैसे महसूस किया जा सकता है? 

(क) संसार से अलग होकर                   (ख) भीड़ में नहीं रहकर 

(ग) एकांत से प्रेम करके                     (घ)  अकेले रहकर 

16- गैंडे के सींग की क्या विशेषता होती है?

 (क)  वह किसी को हानि नहीं पहुंचाता    (ख) वह सींग नहीं वरन सींग का अपररूप होता है । (ग) गैंडे अकेले रहते हैं इसलिए सींग भी अकेला रहता है।  (घ) अपनी दुनिया में मस्त रहना 

17- धर्म के क्षेत्र में एकांत का क्या योगदान है?

 (क)  समर्पण की भावना                 (ख) पूजा और साधना

 (ग)  धर्मांधता से मुक्ति                 (घ) धर्म के वास्तविक स्वरूप की पहचान 


18- नई अंतर्दृष्टि से आप क्या समझते है? 

(क)  नई खोज                                   (ख) नया अनुसंधान 

(ग) नई संकल्पना                                 (घ) नया सिद्धांत ।

19-ईश्वर एक अनुपस्थिति है- कैसे?

 (क) ईश्वर कभी दिखाई नहीं देते                 (ख)ईश्वर कभी उपस्थित नहीं होता 

(ग)  एकांत में ही ईश्वर महसूस होते हैं            (घ) ईश्वर होते ही नहीं हैं 

20- एकांत में रहने का अर्थ है? 

(क) दोस्त नहीं बना सकना                (ख) संसार को जानने का अवसर मिलना 

(ग) अपने प्रिय लोगों को जानने का अवसर मिलना (घ) संसार और प्रकृति की सुंदरता को देखना 


प्रश्न-निम्नलिखित में किसी एक  पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :-1 x 5 = 5

वैराग्य छोड़ बाँहों की विभा सँभालो 

चट्टानों की छाती से दूध निकालो |

है रुकी जहाँ भी धार, शिलाएँ तोड़ो,

पियूष चंद्रमाओं को पकड़ निचोड़ो |

चढ़ तुंग शैल-शिखरों पर सोम पियो रे !

योगियों नहीं, विजयी के सदृश जियो रे !

छोडो मत अपनी आन, सीस कट जाए 

मत झुको अनय पर, भले व्योम फट जाए |

दो बार नहीं यमराज कंठ धरता है 

मरता है जो एक ही बार मरता है |

नत हुए बिना जो अशनि घात सहती है 

स्वाधीन जगत में वही जाति रहती है |

21 कवि किसे छोड़ने की बात कर रहा है ?

(क) मोह- माया       (ख) वैराग्य    (ग) सांसारिक सुख      (घ) बाँहों की शक्ति  

22- कवि किसके समान जीने को कहता है ?

क-योगियों के     ख- भोगियों के    ग-विजयी व्यक्तियों के     घ-राजाओं के 

23- भले व्योम फट जाए’ का अर्थ है –

(क) कितनी ही मुसीबत आ जाए |            (ख) मूसलाधार वर्षा हो जाए |

(ग) आसमान दो टुकड़ों में बंट जाए |       (घ) आसमान से फूलों की वर्षा हो जाए 

24 जो बिना झुके मुसीबतों का सामना करते हैं, वे किसका उपभोग करते हैं ?

(क) दुखों का       (ख) सुखों का       (ग) परतंत्रता का       (घ) स्वतंत्रता का 




25-इन पंक्तियों में कवि क्या प्रेरणा दे रहा है ?

क- आन-बान की रक्षा करने की           ख- जीवन की रक्षा करने की 

ग-धन संपत्ति की रक्षा करने की           घ-उपर्युक्त सभी है ।

                      अथवा

विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी 

मरो परन्तु यों मरो याद जो करे सभी | 

हुई न यों सु- मृत्यु तो वृथा मरे , वृथा जिए 

मरा नहीं वही कि जो जिया न आप के लिए 

यही पशु- प्रवृति है कि आप-आप ही चरे 

वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे |

उसी उदार की कथा सरस्वती बखानती 

उसी उदार से धरा कृतार्थ भाव मानती |

उसी उदार कि सदा सजीव कीर्ति कूजती 

तथा उसी उदार को समस्त सृष्टि पूजती 

अखंड आत्म भाव जो असीम विश्व में भरे 

वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे

26- मर्त्य’ का प्रयोग कवि ने किसके लिए किया है ?

(क) देवता           (ख) मछली            (ग) मनुष्य           (घ) असुर 

27-‘सु-मृत्यु’ की प्रमुख विशेषता क्या है ? 

(क) मरने के बाद लोग याद करते हैं           (ख) घर में मृत्यु हो 

(ग) युद्धभूमि में मृत्यु हो                    (ग) रोग से मृत्यु हो 

28 पशु - प्रवृत्ति क्या है ?

(क) चारा खाना                            (ख) केवल अपना स्वार्थ साधना 

(ग) सबकी भलाई के बारे में सोचना            (घ) जंगल में रहना 

29 सरस्वती किसकी कथा बखानती है ?

(क) जो मानव दूसरों के लिए अपनी जान दे दे    (ख) जो विजयी हो 

(ग) जो साहसी हो                           (घ) जो अपनी सुरक्षा हेतु जान दे दे 

30- उसी उदार की सदा सजीव कीर्ति कूजती’ में कौनसा अलंकार है ?

(क) मानवीकरण                             (ख) उत्प्रेक्षा 

(ग) यमक                                   (घ) अनुप्रास

                       

                  खण्ड-ब-  अभिव्यक्ति और माध्यम पर आधारित प्रश्न  

प्रश्न –निम्नलिखित में से किन्ही 05 प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उचित विकल्पों का चयन कीजिए |1x5 =5      




31- भारत में पहला छापाखाना कब और कहाँ पर खुला था ?

(क) सन 1861 कलकत्ता में    (ख) सन 1556 गोवा में 

(ग) सन 1556 मद्रास में      (घ) सन 1526 नागपुर में 

32 सरकारी कामकाज पर पैनी नज़र रखते हुए गड़बड़ियों को उजागर करने वाली पत्रकारिता कहलाती है ?

(क) खोजी पत्रकारिता           (ख) विशेषीकृत पत्रकारिता 

(ग) वॉचडॉग पत्रकारिता          (घ) एड्वोकेसी पत्रकारिता 

33 संवाददाताओं को उनकी रुचियों और ज्ञान के आधार पर कार्य का विभाजन कहलाता है ?

(क) बीट            (ख) लाइव             (ग) पीट               (घ) डेस्क 

34- हिंदी का पहला समाचार पत्र `उदन्त मार्तण्ड ` किस प्रकार का पत्र था ?

(क) दैनिक पत्र        (ख) साप्ताहिक पत्र       (ग) पाक्षिक पत्र        (घ) मासिक पत्र

35- जब तक खबर के दृश्य नहीं आते एंकर , दर्शकों को रिपोर्टर से मिली जानकारियों के आधार पर सूचना पहुँचाता है | कहलाता है ?

क) एंकर – पैकेज      (ख) एंकर – बाइट     (ग) ड्राई – एंकर    (घ) एंकर – विजुअल

36- समाचार लेखन की उल्टा पिरामिड शैली क्या है  ?

क-समाचारों को लिखने की पद्धति

ख-समाचारों को महत्व के घटते हुए क्रम में लिखना

ग- समाचारों को महत्व के बढ़ते हुए क्रम में लिखना

घ-समाचार सही व सटीक तरीके से लिखने का तरीका


                         खण्ड- स – पाठ्य पुस्तक और अनुपूरक पुस्तक

निम्नलिखित  काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढिए । 

जाने क्या रिश्ता है, जाने क्या नाता है

जितना भी ऊँड़ेलता हूँ भर-भर फिर आता है

दिल में क्या झरना है ?

मीठे पानी का सोता हैं

भीतर वह, ऊपर तुम

मुसकाता चाँद ज्यों धरती पर रात-भर

मुझ पर त्यों तुम्हारा ही खिलता वह चेहरा है !" 

37" जितना भी ऊँड़ेलता हूँ भर-भर फिर आता है- पंक्ति में कौन सा अलंकार है ?

 (क) मानवीकरण     (ख) विरोधाभास     (ग) रूपक       (घ) संदेह             

 








38- भीतर वह, ऊपर तुम"  पंक्ति में  "वह" शब्द का प्रयोग

    किसके लिए किया गया है ?

(क) प्रिया के लिए

(ख) निराशा के लिए

(ग) मनोभावों के लिए

(घ) आशा व उत्साह के लिए     

39- प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने अपने प्रिय की तुलना किससे की है ?

(क) चांदनी से

(ख) ठंडी बयार से

(ग) शीतल किरणों से

(घ) चांद से       

40-- पद्यांश के आधार पर बताइए कि कवि का अपने संबंधी के 

  साथ कैसा संबंध है ?

(क) घनिष्ठ/सघन

(ख) विरल/सतही

(ग) सरल/साधारण

(घ) उपर्युक्त तीनों

41- इस काव्यांश में कवि किसे परिभाषित करना चाहता है ?

क-प्रिय से संबंध    ख-प्रकृति से संबंध    ग- ईश्वर से संबंध     घ- उपर्युक्त सभी से 


प्रश्न-    निनलिखित  गद्यांश  को ध्यानपूर्वक पढिए । 

हम आज देश के लिए करते क्या हैं? माँगे हर क्षेत्र में बड़ी-बड़ी हैं पर त्याग का कहीं नामो-निशान नही है। अपना स्वार्थ आज एक मात्र लक्ष्य रह गया है। हम चटखारे लेकर इसके या उसके भ्रष्टाचार की बातें करते हैं, पर क्या कभी हमने जाँचा है कि अपने स्तर पर अपने दायरे में हम उसी भ्रष्टाचार के अंग तो नही बन रहे हैं? काले मेघा दल के दल उमड़ते हैं, पानी झमाझम बरसता है पर गगरी फूटी की फूटी रह जाती है, बैली पियासे के पियासे रह जाते है! आखिर कब बदलेगी यह स्थिति ।

42-देश की वर्तमान स्थिति के बारे में लेखक के क्या विचार हैं ?

क-वर्तमान समय में सभी स्वार्थी हो गए हैं

ख-समाज में सर्वत्र भ्रष्टाचार व्याप्त है

ग-सभी को अपने स्वार्थ से मतलब है देश की प्रति अपने कर्तव्यों से किसी को कोई मतलब नही

घ-उपरोक्त सभी





43आशय स्पष्ट कीजिए- 'पानी झमाझम बरसता है पर गगरी फूटी की फूटी रह जाती है, बैल पियासे के पियासे रह जाते है! 

क-बरसात होने के बाद भी जानवर प्यासे ही रह जाते हैं

ख-गगरी फूटी होने के कारण जानवर प्यासे    हैं

ग-जोरों का पानी बरस रहा है

घ-सरकार द्वारा बहुत सारी योजनायें बनाए जाने के बाद भी उसका लाभ गरीबों को नही मिल पाता

  

44- लोग चटखारे लेकर क्या करते हैं ?

क-आपस में बातें करते हैं

ख-एक-दूसरे का मजाक उड़ाते हैं

ग-दूसरे द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार की बातें करते हैं

घ-अपना सुख-दुख एक-दूसरे से कहते हैं                 

45- ‘स्वार्थ’ का पर्यायवाची शब्द है-

क-परमार्थ       ख-नि:स्वार्थ    ग-स्वहित     घ-पदार्थ  घ-देश व समाज के प्रति अपने कर्तव्यों के पालन का 

46-उपर्युक्त गद्यांश  के लेखक का क्या नाम है?  

क-महादेवी वर्मा       ख-धर्मवीर भारती     ग-रज़िया सज्जाद जाहिर      घ-जैनेन्द्र कुमार  


प्रश्न - निम्नलिखित में से किन्हीं 05 प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उचित विकल्पों का चयन कीजिए :-1 x 5 = 5 

47- दिन जल्दी- जल्दी ढलता है – किस तथ्य की ओर संकेत करता है ?

(क) संसार में सुख और दुख दोनों रहते हैं    

 (ख) यह संसार स्वार्थी है 

(ग) इस संसार में कई तरह के लोग रहते हैं  

 (घ) जीवन का समय बहुत जल्दी निकल जाता

48- जीजी सभी धार्मिक अनुष्ठान लेखक से क्यों करवाती  थीं?

(क) क्योंकि लेखक उन अनुष्ठानों को अच्छेसे करना जानता था

(ख) क्योंकि लेखक उन अनुष्ठानों में होनेवाले मंत्रों को जानता था

(ग) क्योंकि वे चाहती थीं कि उनका पुण्य लेखकको मिले

(घ) क्योंकि वो लेखक की रुचि उन अनुष्ठानोंमें जगाना चाहती थीं

49-.भक्तिन पाठ के आधार पर पंचायतों की क्या तस्वीर उभरती है?


(क) पंचायतें गूंगी,लाचार और अयोग्य है   |    (ख) वे सही न्याय नहीं कर पाती 

(ग) वे दूध का दूध और पानी का पानी करती हैं  (घ) वे अपने स्वार्थों को पूरा करती हैं 

50 कविता के बहाने’कविता में किसका महत्व बताया गया है ?

(क) चिड़िया की उड़ान का                (ख) फूल के खिलने का 

(ग) बच्चों के खेल का                    घ) रचनात्मक ऊर्जा या सृजन शक्ति का



51--कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता का मुख्य कथ्य है –

क-समाज दिव्यांगजनो के प्रति संवेदनशील नहीं है |

ख-दिव्यांगजनो के प्रति करुणा के मुखौटे में छिपी क्रूरता की कविता है |

ग-मिडिया का व्यवहार स्वार्थी है |

घ-उपर्युक्त में से कोई नहीं |

52-"बाजार के जादू" की पकड़ से बचने का सीधा-सा उपाय क्या हैं?

(क) जब ग्राहक बाजार में जाए तो उसके मन में भटकाव नहीं होना चाहिए।

(ख) उसे अपनी जरूरत के बारे में स्पष्ट पता होना चाहिए।

(ग) उपर्युक्त दोनों विकल्प सही हैं |        

 (घ) उपर्युक्त सभी विकल्प असत्य हैं |           

प्रश्न-पूरक पुस्तक – वितान पर आधारित निम्नलिखित में किन्ही 5 प्रश्नों  में  निर्देशानुसार विकल्पों  का चयन कीजिए | 05

 

53- सिल्वर वैडिंग कहानी की मूल संवेदना क्या है ?

(क.) पीढ़ीयों का अन्तराल                (ख) हांसिये पर धकेले जाते मानवीय मूल्य 

(ग.) पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव          (ग.) उपरोक्त सभी 

54- जूझ’ कहानी के आधार पर बताइए कि एक प्रभावशाली शिक्षक किस तरह अपने विद्यार्थी का भविष्य संवार सकता है?

क-. प्रेरक, मार्गदर्शक, सौंदलगेकर  जैसा अध्यापक हो ।     ख-अच्छा अंक देने वाला अध्यापक हो

ग-. देखने में सुंदर लगने वाला अध्यापक हो             घ-मारपीट कर सुधार करने वाला अध्यापक होना चाहिए |


55-मूर्ख लोग घर बनाते हैं और सयाने उसमें रहते हैं – ये कथन किसका है ?

क-यशोधर बाबू का   ख- किशन दा का   ग- भूषण का     घ-किसी का नहीं |

56- किशन दा सुबह सैर से लौटते वक्त यशोधर बाबू के घर में झांकते हुए क्या कहते थे ?

क-हेल्दी –वेल्दी एंड वाइज    ख- शुभ प्रभात    ग-यशोधर बाबू    घ-इसमें से कोई नहीं |

57- सिल्वर वेडिंग पाठ में मर्यादा पुरुष किसे कहा गया है?

क-यशोधर बाबू को

ख-. कृष्णा नंद पांडे को(किशन दा )

ग-भूषण को

घ-रमेश को 

58-विषम परिस्थितियों में भी विकास संभव है जूझ  कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए? सही विकल्प चुनिए ।

क-समस्याओं से जूझने वाला

ख-आत्मनिर्भर

ग-सपने को साकार करने के लिए मुकाबला करना

घ-उपर्युक्त सभी सही है-

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

Sunday, 14 November 2021

सीसीए कार्यभार ग्रहण करते समय आवश्यक बातें (सभी मित्रों को सहयोग हेतु हार्दिक धन्यवाद)

 




(यदि कुछ त्रुटियाँ हों तो अवश्य ही अवगत कराएँ।)

जब भी आपको सीसीए का कार्यभार मिले तो कौन-कौन सी बातों का ध्यान रखें ...


1. ज़्यादातर विद्यालयों में सीसीए हेतु ये तीन रजिस्टर उपयोग में लाए जाते हैं (इनकी संख्या कम या ज़्यादा भी हो सकती है) :— 


१. सीसीए एक्टिवीटी व परिणाम रजिस्टर

२. सीसीए स्टॉक रजिस्टर(कंस्यूमेबल और परमानेंट आर्टिकल)

३. सीसीए नोटिस रजिस्टर


इनके अतिरिक्त आप कुछ फ़ाईल्ज भी रख सकते हैं, जैसे :— ई-मेल/लेटर , प्रतिभागी नाम, परिणाम-प्रपत्र ।


2. सीसीए स्टॉक पंजीका में सारी प्रविष्टियाँ निल करके दर्ज हों । सारे पृष्ठ अवश्य ही गिन लिए जाएँ, कहीं कोई पृष्ठ न गुम हो , जाँच लीजिए । साथ ही जहाँ कहीं आवश्यकता हो प्राचार्य के हस्ताक्षर भी जाँच लीजिए । 


3. यदि निल नहीं तो जो भी सामान/वस्तु है, वो अपनी आँखों से देखकर ही लें। 


4. एक चेकलिस्ट अवश्य ही बना या बनवा लें। इस पर वस्तुओं के नाम व पूर्व प्रभारी तथा प्राचार्य के हस्ताक्षर अवश्य करवा लीजिए । इसकी तीन प्रतियाँ लीजिए ।


5. सीसीए कैलेण्डर, हाउस लिस्ट, विद्यार्थी परिषद् लिस्ट आदि भी अवश्य ही प्राप्त कर लेने चाहिए । 


6.  आप एक कार्यालय आदेश भी जारी करवा सकते हैं, जिसमें ये भी लिखा हो कि भविष्य में मुझे जो जानकारी और सहयोग चाहिए, वो आप मुझे उपलब्ध करवाएँगे । 


7. महापुरुषों की फ़ोटो , बैनर , मोमबत्ती आदि सामग्री यदि उपलब्ध हो ।

 

8. जो भी सामान और रजिस्टर आपको दिए जाएँ वो सब आप लिखित में मय प्राचार्य महोदय के हस्ताक्षर के साथ लीजिएगा।

और उस लिखित पत्र की एक प्रतिलिपि अपने पास , एक पूर्व प्रभारी के पास और   एक प्राचार्य के पास आवश्यक रूप से रखिएगा । 

साथ ही दोनो विभाग से संबंधित पुराने सभी रिकॉर्ड और रजिस्टर भी ले लीजिएगा...

जो भी समान दिया जा रहा हो सब गिन कर लीजिएगा। चाबियाँ, पुराने रिकोर्डस, Annual Verification list etc. भी हों तो अवश्य ही लीजिएगा ।


9. एक ऐसी लिस्ट भी अवश्य प्राप्त कर लीजिए जिसमें उन बच्चों के नाम हों जो सह-शैक्षिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। जैसे :- Anchoring’s student लिस्ट, भाषण में प्रवीण बच्चे, कविता, वाद-विवाद, रचनात्मक लेखन, skit आदि।


10. एक ऐसी लिस्ट भी प्राप्त की जा सकती है, जिसमें उन सब वस्तुओं के नाम हों , जो माँगी गई किंतु विद्यालय में नहीं आई अभी तक या माँगी जानी चाहिए थीं किंतु माँगी नहीं गई।


(नोट :— ये कोई आधिकारिक लिस्ट नहीं है, अपितु अपने मित्रों से पूछकर या स्वयं सोचकर मैंने बनाई है ताकि सीसीए का कार्यभार-हस्तांतरण भी व्यवस्थित तरीक़े से हो और सीसीए गतिविधियों को भी थोड़ी गम्भीरता से लिया जाना शुरू किया जाए। कार्यभार-हस्तांतरण सब विद्यालयों में एक-जैसा नहीं है , अतः अपने विद्यालय के वातावरण/माहौल के अनुसार ही कार्यभार-हस्तांतरण करें । यहाँ लिखे नियम hard and fast नहीं हैं, इन्हें practical रूप में ही लीजिए अर्थात् देश, काल और वातावरण अनुसार ही प्रयोग करें ।) 

Wednesday, 10 November 2021

‘राष्ट्रीय शिक्षा दिवस’ रिपोर्ट (National Education Day Report)





 सेवा में,


श्रीमान उपायुक्त महोदय,


केंद्रीय विद्यालय संगठन,


भुवनेश्वर संभाग।


 


विषय :-  ‘राष्ट्रीय शिक्षा दिवस" की विस्तृत रिपोर्ट


 


महोदय,


 


       विनयपूर्ण निवेदन है कि राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 11 नवंबर को विद्यालय में उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस दौरान विद्यालय में अनेक गतिविधियों का आयोजन किया गया जिनका विवरण अग्रलिखित है :-


 


           कार्यक्रम

     


        इस उपलक्ष्य में विद्यालय में नारा लेखन, पोस्टर मेकिंग, हिंदी निबंध लेखन , वक्तृत्व कला प्रतियोगिता  और वेबिनार जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए । इससे सम्बंधित एक फ़ाइल अलग से भेजी जा रही है । कार्यक्रम से सम्बंधित फ़ोटो साथ ही संलग्न हैं । 



            11 नवम्बर को विद्यालय में औपचारिक रूप से राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया गया । प्राचार्य मैम और सभी अध्यापकगण द्वारा मौलाना साहब के चित्र पर पुष्पार्पण किया गया।


            इस अवसर पर मुख्याध्यापक श्री अविराम दास सर ने शिक्षा को लेकर अपने दूरदर्शी विचार प्रस्तुत करने के साथ ही मौलाना साहब के जीवन पर प्रकाश डाला । 


             प्राचार्य श्रीमती अनीता दाश मैम ने शिक्षा के महत्त्व को इंगित करते हुए बताया कि हम सभी को अपने अंदर एक जिज्ञासु  और रचनात्मक व्यक्ति का निर्माण करना चाहिए । उन्होंने मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के सम्पूर्ण जीवन का ख़ाका रोचक तरीक़े से प्रस्तुत किया । 

 

श्रीमती अर्चना कुमारी ने कार्यक्रम का संचालन किया । 


      

समन्वयक


श्री घनश्याम


                                                                                             प्राचार्य

                                                                               

(श्रीमती अनीता दाश)

केंद्रीय विद्यालय क्रमांक -४ ,

भुवनेश्वर 





Thursday, 4 November 2021

सफल होने की चार सीढ़ियाँ — साभार संकलन

 








सफल होने की 4 सीढ़ियां



सफलता :– 

 :— किसी भी मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी इच्छा, जो वह हर हाल में प्राप्त करना चाहता है और उसके लिए वह अनेक प्रयत्न करता है । हर मनुष्य चाहता है कि जो भी कार्य शुरू करें उसमें वह शत-प्रतिशत सफल हो । असफलता को इतनी आसानी से स्वीकार नहीं कर पाता । परंतु इंसान अपने हर कार्य में सफल हो, यह जरूरी नहीं है और यह शायद संभव भी नहीं है । परंतु फिर भी वह इसके लिए अनेक प्रयत्न करता है । सफलता के लिए कई चीजें मायने रखती है, कई बातें महत्वपूर्ण होती है । इसके लिए आपका सामाजिक – आर्थिक परिवेश ,आपके मित्र, आपके पड़ोसी ,आपका पर्यावरण ,आपके चारों तरफ का आवरण, आपका परिवार — सभी बहुत मायने रखते हैं । अगर सबकुछ आपके अनुकूल है तब तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता, परंतु अगर परिस्थितियां इसके प्रतिकूल है तब थोड़ी सी परेशानी आती है । लेकिन उन  प्रतिकूल परिस्थितियों से लड़कर सफल होना ही असली सफलता है । इसके अलावा जो अन्य बातें आवश्यक है सफल होने के लिए उनमें से जो प्रमुख चार बातें हैं ,जो प्रमुख चार आयाम , चार सीढ़ियां या चार सूत्र आप बोल सकते हैं वे हैं —


1* दृढ़ इच्छाशक्ति यानी स्ट्रांग डिटरमिनेशन पावर:—


 हिंदी में एक कहावत है–

 "मन ही मन की मानता, मन की मन से प्रीत ।

मन ही मन का शत्रु ,मन ही मन का मीत ।

मन के हारे हार है ,मन के जीते जीत !" आप समझ गए होंगे ।हमारे बड़े– बड़े दार्शनिक ,बड़े –बड़े विचारक भी यह बात कह गए हैं कि अगर आपने यह सोच लिया है कि आप हार जाएंगे तो आप हंड्रेड परसेंट यकीन मानिए कि आप हार जाएंगे ! लेकिन अगर किसी कार्य के बारे में आपने यह ठान लिया, आपने यह मान लिया कि आप इस कार्य में सफल होंगे तो 200% सच मानिए कि आप इस कार्य में सफल होंगे ! सफलता की जो पहली सीढ़ी है, जिस पर कदम रख कर आप आगे की ओर बढ़ेंगे ,वह है आपकी दृढ़ इच्छा शक्ति याने स्ट्रांग डिटरमिनेशन पावर । यह दृढ़ इच्छाशक्ति ही थी कि अकेले बनवासी राम ने वानरों की सहायता से सौ योजन समुद्र को बांध दिया । ना सिर्फ बांध दिया बल्कि उसे पार करके लंकापति रावण जैसे विश्व विजयी राक्षस की सेना और उसके भाइयों को हराया । यह इच्छाशक्ति का ही परिणाम था कि अकेले गौतम बुद्ध ने बौद्ध धर्म चलाया । यह इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि अकेली छोटी चीटियां मिलकर एक बड़े से बड़े हाथी को भी अपने वश में कर लेती हैं । यकीन मानिए अगर आपके अंदर इच्छाशक्ति है, अगर आपने यह ठान लिया है कि मुझे हर हाल में इस कार्य में सफल होना है तो फिर आप को इस से कोई नहीं रोक सकता । बहुत से कार्य हम जोश में आकर शुरू तो कर लेते हैं परंतु उस कार्य में आगे आने वाली परिस्थितियों से ,उस कार्य में मिलने वाली कठिनाइयों से विचलित हो जाते हैं और फिर उस कार्य को हम छोड़ देते हैं । आप एक सिंपल सा उदाहरण देख सकते हैं । अभी बच्चों की परीक्षाएं चल रही है । हर बच्चा अपनी पढ़ाई का एक टाइम टेबल बनाता है ,यह आपने भी अपने जीवन में किया होगा ,इसका अनुभव आपको भी होगा जब हम पढ़ाई के लिए टाइम टेबल बनाते हैं अपने दैनिक जीवन का ,तब हम उसमें पढ़ाई का पूरा ब्यौरा लिखते हैं और निश्चय करते हैं कि हम इसका पालन करेंगे , परंतु अगले दिन से ही हमारा सारा डेली रूटीन धरा का धरा रह जाता है और हम बोलते हैं अरे आज नहीं कल शुरू कर लेंगे परंतु कल कभी नहीं आता ।इसलिए जरूरी है कि आप काम शुरू करें, उसके प्रति दृढ़ बने रहे तभी आप उसमें सफलता प्राप्त कर सकते हैं ।


2 * स्व मूल्यांकन या आत्मनिरीक्षण :–

  :— यह तो आपको भी पता है कि आप से ज्यादा आपके बारे में कोई नहीं जानता ! आप क्या कर सकते हैं ,क्या नहीं कर सकते ,इसे आप से बेहतर कोई नहीं जान सकता । इसलिए जरूरी है कि आप अपना स्वयं मूल्यांकन खुद करें । आपकी किस विषय में रुचि है ,कौन सा विषय आपका पसंदीदा है ,वह कौन सा ऐसा क्षेत्र है जिसमें आप लगन के साथ-साथ अपनी पसंद और अपनी रूचि के अनुसार कार्य कर सकते हैं ,तभी अब उस कार्य को बेहतर नहीं बेहतरीन ढंग से कर पाएंगे ।आपको अपने अंदर की शक्तियों को स्वयं जानना होगा  । इसीलिए मैंने स्व मूल्यांकन शब्द का प्रयोग किया है । ईश्वर ने संसार के किसी भी प्राणी को यूं ही नहीं बनाया ,बेकार में नहीं बनाया । हर किसी के अंदर कोई ना कोई विशेषता, कोई न कोई विशेष गुण देकर भेजा है । बस आवश्यकता है उन विशेष गुणों को जानने की, उसे समझने की । परंतु हम क्या करते हैं ?? हम इंतजार करते रहते हैं कि कोई आए और हमें प्रेरित करे हमें । क्या आपको लगता है कि आज  की दुनिया में जहां लोगों के पास अपने लिए समय नहीं है , वहां आपको कोई जगाने आएगा । दूसरी बात ,आज की दुनिया में जहां लोग अपने दुख से दुखी नहीं बल्कि दूसरों के सुख से दुखी हैं ,जहां लोग आपकी सफलता से ही चिढ़ते हैं ,जहां लोगों को इसलिए तकलीफ हो रही है कि उसके पेट में दर्द क्यों  नहीं हो रहा है, मेरे पेट में क्यों हो रहा है!!! क्या आपको लगता है कि लोग आपको जगाने !! इसलिए आपके अंदर जो टैलेंट है उसे आपको खुद को बाहर निकालना पड़ेगा ,आपको खुद को जानना पड़ेगा ,आपको खुद तय करना पड़ेगा । आप कीजिए ना कोशिश । हर क्षेत्र में अपना हाथ आजमाइए,पता तो चले कि बंदे का हाथ किस कार्य में तेज चलता है ,बंदे की रूचि किसमें है । 'Do not wait for someone to pinch you, to provoke you, to let you know that what special features you have'.



3 * कड़ी और अनवरत मेहनत :– 

:—यह तो आपको मानना पड़ेगा कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं और सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं  । 'There is no shortcut to success 'यहां कोई आपको विद्या गेस या नोट्स नहीं मिलेंगे कि बेटा इसको पढ़ ले तो परीक्षा में पास हो जाएगा ! इसके लिए तो आपको खुद के हाथ पैर चलाने ही होंगे, और तब तक चलाने होंगे जब तक जीत नहीं जाते l आपको भूख प्यास छोड़ना होगा, आपको आपकी 12 घंटे की नींद छोड़नी होगी ,आप को दिन दूनी ,रात चौगुनी मेहनत करनी पड़ेगी l हाथ पर हाथ धरे रह कर के तो आप सफलता के मायने भूल जाइए l हमारे पूर्वज कह गए हैं

" उद्यमेन हि सिध्यंति कार्याणि ना मनोरथै:!

 ना ही सुप्तस्य सिंहस्य प्रविष्यंति मुखे मृगा: !!" बिना मेहनत किए तो सफलता प्राप्त करना बारिश की बूंदों को पकड़कर आसमान चढ़ने के बराबर है! बिना हाथ हिलाए तो पंखे की हवा भी हम नहीं ले  सकते । बिना हाथ हिलाए थाली में रखा हुआ भोजन भी हमारे मुंह में नहीं जा सकता । यहां तक कि हमें सांस लेने के लिए भी मेहनत करनी पड़ती है । हम एक साथ छोड़ेंगे तभी दूसरी सांस लेंगे तो मेहनत तो आपको करनी पड़ेगी । इसके अलावा आपके पास और कोई उपाय नहीं है । अब कोई भी तिकड़म लगा लीजिए, कोई भी शॉर्टकट तरीका अपना लीजिए ,यह संभव नहीं है । अगर आप स्थाई सफलता, स्थाई ख्याति चाहते हैं ,तो भाई !!आपको तो हाथ पैर चलाना पड़ेगा , दैनिक जीवन की मेहनत के अलावा आपको एक्स्ट्रा एफर्ट लगाने होंगे फिर चाहे आप कहीं से भी कोशिश करें ।


4 * -एकाग्रता या एकनिष्ठता :—

:— यह तो आपको मानना पड़ेगा कि बिना एकाग्र हुए, बिना एक निष्ठ हुए, दो चीजें प्राप्त नहीं हो सकती– पहला प्रेम और दूसरी सफलता । दोनों के लिए ही किसी एक पर (जिसे हमने चाह लिया उस पर) केंद्रित होना बहुत जरूरी है इसलिए आवश्यक है कि बाकी सारी चीजों को भूल कर ,बाकी सारी बातों को दरकिनार कर आपको उस एक व्यक्ति और आपको एक बिंदु पर अपना पूरा का पूरा ध्यान केंद्रित करना पड़ेगा । इसके लिए आपको अपने दोस्तों से दूर होना पड़ेगा, आपको सोशल मीडिया से दूरी बनानी पड़ेगी, आपको पार्टीज में जाना कम करना पड़ेगा, आपके अपने दोस्तों के साथ रेस्टोरेंट में खाना खाना बंद करना पड़ेगा, घूमने फिरने में जो आप अपना समय बर्बाद करते हैं ,उसे रोकना होगा ।अगर आप दोनों हाथों में लड्डू रखना चाहेंगे तो यह संभव नहीं है । आपको अर्जुन की तरह सिर्फ और सिर्फ मछली की आंख पर ही ध्यान केंद्रित करना होगा । अगर आप मछली की आंख भी देखेंगे, पत्ते भी देखेंगे, फल पर भी आपका ध्यान होगा, पेड़ों की डालियां भी आपको आकर्षित करेंगे और भीम भैया के हाथों में रखा हुआ लड्डू भी आपके मुंह में पानी भर रहा होगा ,तब आप मछली की आंख भूल जाइए । द्रोणाचार्य का यह प्रयोग आज भी उतना ही प्रासंगिक है ,जितना उस समय था ।अगर आप यह भी चाहेंगे कि दिन भर आप फेसबुक, टि्वटर, इंस्टाग्राम पर एक्टिव रहो दिन भर व्हाट्सएप चलाओ और अपने लक्ष्य में भी शत-प्रतिशत सफलता हासिल करूं ,मैं दोस्तों के साथ पार्टीज में भी जाऊं, मैं अपने प्रिय ग्रुप में बैठकर कहकहे लगाऊं और इधर भी सफल हो जाऊं तो आप गलतफहमी में हैं । यह संभव नहीं है ।इसलिए जिस काम को लिया है ,उसके प्रति आपको निष्ठावान होना पड़ेगा । उसको समय देना पड़ेगा । बिना समय दिए आप किसी भी चीज को पूरी तरह से पा नहीं सकते । मुझे पता है थोड़ा अटपटा लग रहा होगा आपको कि मैं आपको यह बातें बोल रही हूं, लेकिन यह जरूरी है ।आपके दिमाग में आ रहा होगा कि ऐसी बातें ऐसी हरकतें अगर मैं करूंगा या करूंगी तो मेरे दोस्त मुझसे दूर हो जाएंगे ,वह मेरा मजाक उड़ाएंगे तो आप यकीन मानिए ,ऐसा होगा । आपके दोस्त आप का मजाक उड़ाएंगे ।आपके ऊपर हंसेंगे ,क्योंकि लीक से हटकर चलने वालों पर दुनिया हमेशा हंसती है । लेकिन आप विश्वास रखें ,जिस समय आपको सम्मान प्राप्त होगा ,जिस समय आप अपनी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किए जा रहे होंगे, आपको भरी सभा में उपाधियां और पुरस्कार दिए जा रहे होंगे उस समय आपके यही दोस्त अपना सीना चौड़ा करके बोलेंगे यह मेरा दोस्त है । इसलिए सारी बातें छोड़िए और आज से और अभी से अपनी मंजिल की ओर लग जाइए। सफलता आपका इंतजार कर रही है विजय माला लेकर । तो जाइए और उस माला को अपने गले में धारण कीजिए ।


— श्रीमती पूनम कुमारी ,

(लेखिका अनुभवी अध्यापिका , जानी-मानी कवयित्री-लेखिका और मोटिवेशनल स्पीकर हैं ।)

🎁दीपावली भेंट (रामचरितमानस अनुवाद सहित और रंगोली पुस्तक चित्रसहित🎁 👏👏 साभार प्राप्त

*॥यदि यहाँ से लिंक open न हो तो कृपया copy करके Whatsapp या google पर paste करते ही open हो जाएगा ।*

🙏👏🍫🥇🏆🏆☘️🍀📗🇮🇳📘🍀☘️🏆🏆🥇🍫👏🙏



 सम्पूर्ण रामचरितमानस अनुवाद-चित्र सहित

*सम्पूर्ण रामचरितमानस अनुवाद-चित्र सहित*🎁



रंगोली-पुस्तक

*रंगोली-पुस्तक*🎁

(ताकि दिवाली पर आप विभिन्न डिज़ाइन देख  सकें ।)


    *॥ये दीपावली-भेंट हैं, कृपया स्वीकार करें ॥*



      *॥# आपको शुभोत्तम दीपावली की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ॥॥#*


    


🙏👏🍫🥇🏆🏆☘️🍀📗🇮🇳📘🍀☘️🏆🏆🥇🍫👏🙏

Educational post 10

 CHANNEL Link  Click here