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Sunday, 14 November 2021

सीसीए कार्यभार ग्रहण करते समय आवश्यक बातें (सभी मित्रों को सहयोग हेतु हार्दिक धन्यवाद)

 




(यदि कुछ त्रुटियाँ हों तो अवश्य ही अवगत कराएँ।)

जब भी आपको सीसीए का कार्यभार मिले तो कौन-कौन सी बातों का ध्यान रखें ...


1. ज़्यादातर विद्यालयों में सीसीए हेतु ये तीन रजिस्टर उपयोग में लाए जाते हैं (इनकी संख्या कम या ज़्यादा भी हो सकती है) :— 


१. सीसीए एक्टिवीटी व परिणाम रजिस्टर

२. सीसीए स्टॉक रजिस्टर(कंस्यूमेबल और परमानेंट आर्टिकल)

३. सीसीए नोटिस रजिस्टर


इनके अतिरिक्त आप कुछ फ़ाईल्ज भी रख सकते हैं, जैसे :— ई-मेल/लेटर , प्रतिभागी नाम, परिणाम-प्रपत्र ।


2. सीसीए स्टॉक पंजीका में सारी प्रविष्टियाँ निल करके दर्ज हों । सारे पृष्ठ अवश्य ही गिन लिए जाएँ, कहीं कोई पृष्ठ न गुम हो , जाँच लीजिए । साथ ही जहाँ कहीं आवश्यकता हो प्राचार्य के हस्ताक्षर भी जाँच लीजिए । 


3. यदि निल नहीं तो जो भी सामान/वस्तु है, वो अपनी आँखों से देखकर ही लें। 


4. एक चेकलिस्ट अवश्य ही बना या बनवा लें। इस पर वस्तुओं के नाम व पूर्व प्रभारी तथा प्राचार्य के हस्ताक्षर अवश्य करवा लीजिए । इसकी तीन प्रतियाँ लीजिए ।


5. सीसीए कैलेण्डर, हाउस लिस्ट, विद्यार्थी परिषद् लिस्ट आदि भी अवश्य ही प्राप्त कर लेने चाहिए । 


6.  आप एक कार्यालय आदेश भी जारी करवा सकते हैं, जिसमें ये भी लिखा हो कि भविष्य में मुझे जो जानकारी और सहयोग चाहिए, वो आप मुझे उपलब्ध करवाएँगे । 


7. महापुरुषों की फ़ोटो , बैनर , मोमबत्ती आदि सामग्री यदि उपलब्ध हो ।

 

8. जो भी सामान और रजिस्टर आपको दिए जाएँ वो सब आप लिखित में मय प्राचार्य महोदय के हस्ताक्षर के साथ लीजिएगा।

और उस लिखित पत्र की एक प्रतिलिपि अपने पास , एक पूर्व प्रभारी के पास और   एक प्राचार्य के पास आवश्यक रूप से रखिएगा । 

साथ ही दोनो विभाग से संबंधित पुराने सभी रिकॉर्ड और रजिस्टर भी ले लीजिएगा...

जो भी समान दिया जा रहा हो सब गिन कर लीजिएगा। चाबियाँ, पुराने रिकोर्डस, Annual Verification list etc. भी हों तो अवश्य ही लीजिएगा ।


9. एक ऐसी लिस्ट भी अवश्य प्राप्त कर लीजिए जिसमें उन बच्चों के नाम हों जो सह-शैक्षिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। जैसे :- Anchoring’s student लिस्ट, भाषण में प्रवीण बच्चे, कविता, वाद-विवाद, रचनात्मक लेखन, skit आदि।


10. एक ऐसी लिस्ट भी प्राप्त की जा सकती है, जिसमें उन सब वस्तुओं के नाम हों , जो माँगी गई किंतु विद्यालय में नहीं आई अभी तक या माँगी जानी चाहिए थीं किंतु माँगी नहीं गई।


(नोट :— ये कोई आधिकारिक लिस्ट नहीं है, अपितु अपने मित्रों से पूछकर या स्वयं सोचकर मैंने बनाई है ताकि सीसीए का कार्यभार-हस्तांतरण भी व्यवस्थित तरीक़े से हो और सीसीए गतिविधियों को भी थोड़ी गम्भीरता से लिया जाना शुरू किया जाए। कार्यभार-हस्तांतरण सब विद्यालयों में एक-जैसा नहीं है , अतः अपने विद्यालय के वातावरण/माहौल के अनुसार ही कार्यभार-हस्तांतरण करें । यहाँ लिखे नियम hard and fast नहीं हैं, इन्हें practical रूप में ही लीजिए अर्थात् देश, काल और वातावरण अनुसार ही प्रयोग करें ।) 

Wednesday, 10 November 2021

‘राष्ट्रीय शिक्षा दिवस’ रिपोर्ट (National Education Day Report)





 सेवा में,


श्रीमान उपायुक्त महोदय,


केंद्रीय विद्यालय संगठन,


भुवनेश्वर संभाग।


 


विषय :-  ‘राष्ट्रीय शिक्षा दिवस" की विस्तृत रिपोर्ट


 


महोदय,


 


       विनयपूर्ण निवेदन है कि राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 11 नवंबर को विद्यालय में उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस दौरान विद्यालय में अनेक गतिविधियों का आयोजन किया गया जिनका विवरण अग्रलिखित है :-


 


           कार्यक्रम

     


        इस उपलक्ष्य में विद्यालय में नारा लेखन, पोस्टर मेकिंग, हिंदी निबंध लेखन , वक्तृत्व कला प्रतियोगिता  और वेबिनार जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए । इससे सम्बंधित एक फ़ाइल अलग से भेजी जा रही है । कार्यक्रम से सम्बंधित फ़ोटो साथ ही संलग्न हैं । 



            11 नवम्बर को विद्यालय में औपचारिक रूप से राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया गया । प्राचार्य मैम और सभी अध्यापकगण द्वारा मौलाना साहब के चित्र पर पुष्पार्पण किया गया।


            इस अवसर पर मुख्याध्यापक श्री अविराम दास सर ने शिक्षा को लेकर अपने दूरदर्शी विचार प्रस्तुत करने के साथ ही मौलाना साहब के जीवन पर प्रकाश डाला । 


             प्राचार्य श्रीमती अनीता दाश मैम ने शिक्षा के महत्त्व को इंगित करते हुए बताया कि हम सभी को अपने अंदर एक जिज्ञासु  और रचनात्मक व्यक्ति का निर्माण करना चाहिए । उन्होंने मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के सम्पूर्ण जीवन का ख़ाका रोचक तरीक़े से प्रस्तुत किया । 

 

श्रीमती अर्चना कुमारी ने कार्यक्रम का संचालन किया । 


      

समन्वयक


श्री घनश्याम


                                                                                             प्राचार्य

                                                                               

(श्रीमती अनीता दाश)

केंद्रीय विद्यालय क्रमांक -४ ,

भुवनेश्वर 





Thursday, 4 November 2021

सफल होने की चार सीढ़ियाँ — साभार संकलन

 








सफल होने की 4 सीढ़ियां



सफलता :– 

 :— किसी भी मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी इच्छा, जो वह हर हाल में प्राप्त करना चाहता है और उसके लिए वह अनेक प्रयत्न करता है । हर मनुष्य चाहता है कि जो भी कार्य शुरू करें उसमें वह शत-प्रतिशत सफल हो । असफलता को इतनी आसानी से स्वीकार नहीं कर पाता । परंतु इंसान अपने हर कार्य में सफल हो, यह जरूरी नहीं है और यह शायद संभव भी नहीं है । परंतु फिर भी वह इसके लिए अनेक प्रयत्न करता है । सफलता के लिए कई चीजें मायने रखती है, कई बातें महत्वपूर्ण होती है । इसके लिए आपका सामाजिक – आर्थिक परिवेश ,आपके मित्र, आपके पड़ोसी ,आपका पर्यावरण ,आपके चारों तरफ का आवरण, आपका परिवार — सभी बहुत मायने रखते हैं । अगर सबकुछ आपके अनुकूल है तब तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता, परंतु अगर परिस्थितियां इसके प्रतिकूल है तब थोड़ी सी परेशानी आती है । लेकिन उन  प्रतिकूल परिस्थितियों से लड़कर सफल होना ही असली सफलता है । इसके अलावा जो अन्य बातें आवश्यक है सफल होने के लिए उनमें से जो प्रमुख चार बातें हैं ,जो प्रमुख चार आयाम , चार सीढ़ियां या चार सूत्र आप बोल सकते हैं वे हैं —


1* दृढ़ इच्छाशक्ति यानी स्ट्रांग डिटरमिनेशन पावर:—


 हिंदी में एक कहावत है–

 "मन ही मन की मानता, मन की मन से प्रीत ।

मन ही मन का शत्रु ,मन ही मन का मीत ।

मन के हारे हार है ,मन के जीते जीत !" आप समझ गए होंगे ।हमारे बड़े– बड़े दार्शनिक ,बड़े –बड़े विचारक भी यह बात कह गए हैं कि अगर आपने यह सोच लिया है कि आप हार जाएंगे तो आप हंड्रेड परसेंट यकीन मानिए कि आप हार जाएंगे ! लेकिन अगर किसी कार्य के बारे में आपने यह ठान लिया, आपने यह मान लिया कि आप इस कार्य में सफल होंगे तो 200% सच मानिए कि आप इस कार्य में सफल होंगे ! सफलता की जो पहली सीढ़ी है, जिस पर कदम रख कर आप आगे की ओर बढ़ेंगे ,वह है आपकी दृढ़ इच्छा शक्ति याने स्ट्रांग डिटरमिनेशन पावर । यह दृढ़ इच्छाशक्ति ही थी कि अकेले बनवासी राम ने वानरों की सहायता से सौ योजन समुद्र को बांध दिया । ना सिर्फ बांध दिया बल्कि उसे पार करके लंकापति रावण जैसे विश्व विजयी राक्षस की सेना और उसके भाइयों को हराया । यह इच्छाशक्ति का ही परिणाम था कि अकेले गौतम बुद्ध ने बौद्ध धर्म चलाया । यह इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि अकेली छोटी चीटियां मिलकर एक बड़े से बड़े हाथी को भी अपने वश में कर लेती हैं । यकीन मानिए अगर आपके अंदर इच्छाशक्ति है, अगर आपने यह ठान लिया है कि मुझे हर हाल में इस कार्य में सफल होना है तो फिर आप को इस से कोई नहीं रोक सकता । बहुत से कार्य हम जोश में आकर शुरू तो कर लेते हैं परंतु उस कार्य में आगे आने वाली परिस्थितियों से ,उस कार्य में मिलने वाली कठिनाइयों से विचलित हो जाते हैं और फिर उस कार्य को हम छोड़ देते हैं । आप एक सिंपल सा उदाहरण देख सकते हैं । अभी बच्चों की परीक्षाएं चल रही है । हर बच्चा अपनी पढ़ाई का एक टाइम टेबल बनाता है ,यह आपने भी अपने जीवन में किया होगा ,इसका अनुभव आपको भी होगा जब हम पढ़ाई के लिए टाइम टेबल बनाते हैं अपने दैनिक जीवन का ,तब हम उसमें पढ़ाई का पूरा ब्यौरा लिखते हैं और निश्चय करते हैं कि हम इसका पालन करेंगे , परंतु अगले दिन से ही हमारा सारा डेली रूटीन धरा का धरा रह जाता है और हम बोलते हैं अरे आज नहीं कल शुरू कर लेंगे परंतु कल कभी नहीं आता ।इसलिए जरूरी है कि आप काम शुरू करें, उसके प्रति दृढ़ बने रहे तभी आप उसमें सफलता प्राप्त कर सकते हैं ।


2 * स्व मूल्यांकन या आत्मनिरीक्षण :–

  :— यह तो आपको भी पता है कि आप से ज्यादा आपके बारे में कोई नहीं जानता ! आप क्या कर सकते हैं ,क्या नहीं कर सकते ,इसे आप से बेहतर कोई नहीं जान सकता । इसलिए जरूरी है कि आप अपना स्वयं मूल्यांकन खुद करें । आपकी किस विषय में रुचि है ,कौन सा विषय आपका पसंदीदा है ,वह कौन सा ऐसा क्षेत्र है जिसमें आप लगन के साथ-साथ अपनी पसंद और अपनी रूचि के अनुसार कार्य कर सकते हैं ,तभी अब उस कार्य को बेहतर नहीं बेहतरीन ढंग से कर पाएंगे ।आपको अपने अंदर की शक्तियों को स्वयं जानना होगा  । इसीलिए मैंने स्व मूल्यांकन शब्द का प्रयोग किया है । ईश्वर ने संसार के किसी भी प्राणी को यूं ही नहीं बनाया ,बेकार में नहीं बनाया । हर किसी के अंदर कोई ना कोई विशेषता, कोई न कोई विशेष गुण देकर भेजा है । बस आवश्यकता है उन विशेष गुणों को जानने की, उसे समझने की । परंतु हम क्या करते हैं ?? हम इंतजार करते रहते हैं कि कोई आए और हमें प्रेरित करे हमें । क्या आपको लगता है कि आज  की दुनिया में जहां लोगों के पास अपने लिए समय नहीं है , वहां आपको कोई जगाने आएगा । दूसरी बात ,आज की दुनिया में जहां लोग अपने दुख से दुखी नहीं बल्कि दूसरों के सुख से दुखी हैं ,जहां लोग आपकी सफलता से ही चिढ़ते हैं ,जहां लोगों को इसलिए तकलीफ हो रही है कि उसके पेट में दर्द क्यों  नहीं हो रहा है, मेरे पेट में क्यों हो रहा है!!! क्या आपको लगता है कि लोग आपको जगाने !! इसलिए आपके अंदर जो टैलेंट है उसे आपको खुद को बाहर निकालना पड़ेगा ,आपको खुद को जानना पड़ेगा ,आपको खुद तय करना पड़ेगा । आप कीजिए ना कोशिश । हर क्षेत्र में अपना हाथ आजमाइए,पता तो चले कि बंदे का हाथ किस कार्य में तेज चलता है ,बंदे की रूचि किसमें है । 'Do not wait for someone to pinch you, to provoke you, to let you know that what special features you have'.



3 * कड़ी और अनवरत मेहनत :– 

:—यह तो आपको मानना पड़ेगा कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं और सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं  । 'There is no shortcut to success 'यहां कोई आपको विद्या गेस या नोट्स नहीं मिलेंगे कि बेटा इसको पढ़ ले तो परीक्षा में पास हो जाएगा ! इसके लिए तो आपको खुद के हाथ पैर चलाने ही होंगे, और तब तक चलाने होंगे जब तक जीत नहीं जाते l आपको भूख प्यास छोड़ना होगा, आपको आपकी 12 घंटे की नींद छोड़नी होगी ,आप को दिन दूनी ,रात चौगुनी मेहनत करनी पड़ेगी l हाथ पर हाथ धरे रह कर के तो आप सफलता के मायने भूल जाइए l हमारे पूर्वज कह गए हैं

" उद्यमेन हि सिध्यंति कार्याणि ना मनोरथै:!

 ना ही सुप्तस्य सिंहस्य प्रविष्यंति मुखे मृगा: !!" बिना मेहनत किए तो सफलता प्राप्त करना बारिश की बूंदों को पकड़कर आसमान चढ़ने के बराबर है! बिना हाथ हिलाए तो पंखे की हवा भी हम नहीं ले  सकते । बिना हाथ हिलाए थाली में रखा हुआ भोजन भी हमारे मुंह में नहीं जा सकता । यहां तक कि हमें सांस लेने के लिए भी मेहनत करनी पड़ती है । हम एक साथ छोड़ेंगे तभी दूसरी सांस लेंगे तो मेहनत तो आपको करनी पड़ेगी । इसके अलावा आपके पास और कोई उपाय नहीं है । अब कोई भी तिकड़म लगा लीजिए, कोई भी शॉर्टकट तरीका अपना लीजिए ,यह संभव नहीं है । अगर आप स्थाई सफलता, स्थाई ख्याति चाहते हैं ,तो भाई !!आपको तो हाथ पैर चलाना पड़ेगा , दैनिक जीवन की मेहनत के अलावा आपको एक्स्ट्रा एफर्ट लगाने होंगे फिर चाहे आप कहीं से भी कोशिश करें ।


4 * -एकाग्रता या एकनिष्ठता :—

:— यह तो आपको मानना पड़ेगा कि बिना एकाग्र हुए, बिना एक निष्ठ हुए, दो चीजें प्राप्त नहीं हो सकती– पहला प्रेम और दूसरी सफलता । दोनों के लिए ही किसी एक पर (जिसे हमने चाह लिया उस पर) केंद्रित होना बहुत जरूरी है इसलिए आवश्यक है कि बाकी सारी चीजों को भूल कर ,बाकी सारी बातों को दरकिनार कर आपको उस एक व्यक्ति और आपको एक बिंदु पर अपना पूरा का पूरा ध्यान केंद्रित करना पड़ेगा । इसके लिए आपको अपने दोस्तों से दूर होना पड़ेगा, आपको सोशल मीडिया से दूरी बनानी पड़ेगी, आपको पार्टीज में जाना कम करना पड़ेगा, आपके अपने दोस्तों के साथ रेस्टोरेंट में खाना खाना बंद करना पड़ेगा, घूमने फिरने में जो आप अपना समय बर्बाद करते हैं ,उसे रोकना होगा ।अगर आप दोनों हाथों में लड्डू रखना चाहेंगे तो यह संभव नहीं है । आपको अर्जुन की तरह सिर्फ और सिर्फ मछली की आंख पर ही ध्यान केंद्रित करना होगा । अगर आप मछली की आंख भी देखेंगे, पत्ते भी देखेंगे, फल पर भी आपका ध्यान होगा, पेड़ों की डालियां भी आपको आकर्षित करेंगे और भीम भैया के हाथों में रखा हुआ लड्डू भी आपके मुंह में पानी भर रहा होगा ,तब आप मछली की आंख भूल जाइए । द्रोणाचार्य का यह प्रयोग आज भी उतना ही प्रासंगिक है ,जितना उस समय था ।अगर आप यह भी चाहेंगे कि दिन भर आप फेसबुक, टि्वटर, इंस्टाग्राम पर एक्टिव रहो दिन भर व्हाट्सएप चलाओ और अपने लक्ष्य में भी शत-प्रतिशत सफलता हासिल करूं ,मैं दोस्तों के साथ पार्टीज में भी जाऊं, मैं अपने प्रिय ग्रुप में बैठकर कहकहे लगाऊं और इधर भी सफल हो जाऊं तो आप गलतफहमी में हैं । यह संभव नहीं है ।इसलिए जिस काम को लिया है ,उसके प्रति आपको निष्ठावान होना पड़ेगा । उसको समय देना पड़ेगा । बिना समय दिए आप किसी भी चीज को पूरी तरह से पा नहीं सकते । मुझे पता है थोड़ा अटपटा लग रहा होगा आपको कि मैं आपको यह बातें बोल रही हूं, लेकिन यह जरूरी है ।आपके दिमाग में आ रहा होगा कि ऐसी बातें ऐसी हरकतें अगर मैं करूंगा या करूंगी तो मेरे दोस्त मुझसे दूर हो जाएंगे ,वह मेरा मजाक उड़ाएंगे तो आप यकीन मानिए ,ऐसा होगा । आपके दोस्त आप का मजाक उड़ाएंगे ।आपके ऊपर हंसेंगे ,क्योंकि लीक से हटकर चलने वालों पर दुनिया हमेशा हंसती है । लेकिन आप विश्वास रखें ,जिस समय आपको सम्मान प्राप्त होगा ,जिस समय आप अपनी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किए जा रहे होंगे, आपको भरी सभा में उपाधियां और पुरस्कार दिए जा रहे होंगे उस समय आपके यही दोस्त अपना सीना चौड़ा करके बोलेंगे यह मेरा दोस्त है । इसलिए सारी बातें छोड़िए और आज से और अभी से अपनी मंजिल की ओर लग जाइए। सफलता आपका इंतजार कर रही है विजय माला लेकर । तो जाइए और उस माला को अपने गले में धारण कीजिए ।


— श्रीमती पूनम कुमारी ,

(लेखिका अनुभवी अध्यापिका , जानी-मानी कवयित्री-लेखिका और मोटिवेशनल स्पीकर हैं ।)

🎁दीपावली भेंट (रामचरितमानस अनुवाद सहित और रंगोली पुस्तक चित्रसहित🎁 👏👏 साभार प्राप्त

*॥यदि यहाँ से लिंक open न हो तो कृपया copy करके Whatsapp या google पर paste करते ही open हो जाएगा ।*

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 सम्पूर्ण रामचरितमानस अनुवाद-चित्र सहित

*सम्पूर्ण रामचरितमानस अनुवाद-चित्र सहित*🎁



रंगोली-पुस्तक

*रंगोली-पुस्तक*🎁

(ताकि दिवाली पर आप विभिन्न डिज़ाइन देख  सकें ।)


    *॥ये दीपावली-भेंट हैं, कृपया स्वीकार करें ॥*



      *॥# आपको शुभोत्तम दीपावली की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ॥॥#*


    


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Monday, 18 October 2021

स्थानांतरण पर बच्चों/अभिभावकगण द्वारा दी गई शुभकामनाएँ 🙏🙏 (मेरे लिए किसी बड़ी डिग्री या उपाधि से कम नहीं)🥇🏆

 भुवनेश्वर से गोपेश्वर - स्थानांतरण 

बच्चों द्वारा दी गई शुभकामनाएँ

 (मेरे लिए किसी बड़ी डिग्री या उपाधि से कम नहीं)





Tuesday, 12 October 2021

केवीएस स्थानांतरण सहयोग (अध्यापकगण दूरभाष) 🥇💐

 साभार प्राप्त :— श्री कृष्ण कौशिक सर 👏👏


*यदि आप भी सहयोग करना चाहते हैं तो कृपया form भरें ।* :— 

https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSfM051WPMmyeCMOC9XdhWknMR4KjfVvAHuv7XkJnf4SkAnOPg/viewform







    स्थानांतरण जारी हैं, सब इधर-से-उधर जा रहे हैं । सबको सहायता की आवश्यकता है। अतः यहाँ से काफ़ी सम्मानित अध्यापकगण के मोबाइल नम्बर प्राप्त किए जा सकते हैं और ये सब आदरणीय व सहयोगी अध्यापकगण आपको अपने विद्यालय आने या उसके आस-पास के विषय में guide कर सकते हैं। 


     इन सभी सम्मानित अध्यापकगण का सबकी तरफ़ से बहुत बहुत आभार... ऐसे समय में अध्यापकगण का एक-दूसरे के काम आना वाक़ई प्रशंसा के योग्य है। सबको बहुत बहुत धन्यवाद...


आपको इस लिंक से पूरी लिस्ट प्राप्त हो जाएगी :— 

https://drive.google.com/file/d/1DO0IAhNW2EQgI5i_pQdX5JSROaoc2SoM/view?usp=drivesdk


यदि लिंक open न हो तो कृपया copy करिए और Whatsapp पर paste कर दीजिए । 



🙏🥇🙏🥇🙏

💐🌸💐🌸💐

Thursday, 23 September 2021

ट्रांसफ़र काउंट - केवल टीजीटी - पीजीटी हिंदी (साभार प्राप्त 👏👏)

 साभार श्री कृष्ण कौशिक .... 

👏👏


नोट :— यदि लिंक यहाँ न खुले तो कृपया copy करके Whatsapp पर paste करें , वहाँ easily खुल जाएगा । 

धन्यवाद 

🙏🥇💐☘️🏆






साभार श्री कृष्ण कौशिक .... 

👏👏



https://docs.google.com/spreadsheets/d/1uJt633uQzjrtAFaLpTaZMJahpMfc3osHlAy2wCjt8Uw/edit

अभिव्यक्ति और माध्यम के 50 बहुविकप्लीय प्रश्न (साभार संकलन👏👏 )

 




विभिन्न माध्यमो के लिए लेखन – प्रिंट और प्रसारण माध्यम – 

1-समाचार पत्र और पत्रिकाएं (प्रिंट माध्यम )

2- टीवी, रेडिओ, इन्टरनेट,सिनेमा  (प्रसारण माध्यम)


पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप – 1-पत्रकारों के प्रकार, विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता एवं प्रिंट माध्यम से संबंधित प्रश्न 

2-फीचर लेखन 

3- आलेख लेखन से संबंधित प्रश्न |

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अभिव्यक्ति एंव माध्यम

(बहुविकल्पीय प्रश्न)


प्र.1) संचार की प्रक्रिया जब बड़े पैमाने पर होती है तब उसे कहते हैं-

     (क) जनमाध्यम                           (ख) मीडीया              

     (ग) जनसंचार                            (घ) संप्रेषण

प्र.2) भारत में पहला रेडियो प्रसारण कब हुआ?

     (क) 25 अगस्त 1927                      (ख) 23 जुलाई 1927    

     (ग) 15 अगस्त 1947                      (घ) 27 सितम्बर 1922

प्र.3) ‘संवाद-कौमुदी’ नामक पत्र के संपादक-संस्थापक कौन थे-

     (क) जुगल किशोर शुक्ल                  (ख) भारतेंदु हरिश्चंद्र     

     (ग) राजा राममोहन राय                   (घ) महावीर प्रसाद द्विवेदी

प्र.4) ‘‘पत्रकारिता को मैं रणभूमि से भी अधिक बड़ी चीज समझता हूँ’ं’- किसका कथन है-

     (क) महात्मा गांधी                        (ख) वेल्बर श्रैम            

     (ग) लोकमान्य तिलक                     (घ) जोंस मैक्डोनल

प्र.5) भारत में दूरदर्शन पर रंगीन प्रसारण कब हुआ?

     (क) 15 अगस्त 1982                     (ख) 10 सितम्बर 1980      

     (ग) 20 अगस्त 1992                     (घ) 10 सितम्बर 1982

प्र.6) संचार की प्रक्रिया कैसी हैं-

     (क) एकमार्गी प्रक्रिया                     (ख) द्विमार्गी प्रक्रिया        

     (ग) बहुमार्गी प्रक्रिया                      (घ) कोई प्रक्रिया नहीं

प्र.7) भारत की पहली बोलती फिल्म थी-

     (क) राजा हरिश्चंद्र                       (ख) पाथेर पांचाली          

     (ग) आलम आरा                         (घ) पुण्डरीक

प्र.8) भारत में हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है-

     (क) 9 जनवरी                           (ख) 14 सितंबर को         

     (ग) 5 सितंबर को                        (घ) 30 मई को




प्र.9) भारत में आकाशवाणी से दूरदर्शन को कब अलग हुआ-

     (क) 1 अप्रैल 1976                       (ख) 15 अगस्त 1985        

     (ग) 23 जुलाई 1969                      (घ) 15 सितबंर 1959

प्र.10) ‘‘संचार अनुभवों की साझेदारी है’’- कथन किसका है-

     (क) ऑगस्ट हिकी                        (ख) विल्बर श्रैम           

     (ग) महात्मा गांधी                         (घ) जुगल किशोर शुक्ल

प्र.11) दूरदर्शन पर प्रसारित खबरों में सबसे महत्त्वपूर्ण है-

     (क) विजुअल                            (ख) नेट                   

     (ग) बाइट                               (घ) उपर्युक्त सभी

प्र.12) समाचार का ककार नहीं है-

      (क) क्या                               (ख) कब                   

      (ग) कर्म                               (घ) कौन

प्र.13) भारत की पहली फिल्म (मूक) थी-

      (क) राजा हरिश्चंद्र                       (ख) पाथेर पांचाली          

      (ग) आलम आरा                         (घ) पुण्डरीक

प्र.14) भारत में इण्टरनेट कब आरंभ हुआ?

      (क) 10 अगस्त 1995                      (ख) 26 जनवरी 1950      

      (ग) 15 अगस्त 1995                      (घ) 14 सितम्बर 1991

प्र.15) रेडियो समाचार की भाषा ऐसी हो-

     (क) जिसमें आम बोलचाल के शब्दों का प्रयोग हो     

     (ख) जो समाचार वाचक आसानी से पढ़ सके             

     (ग) जिसमें आम बोलचाल की भाषा के साथ-साथ सटीक मुहावरों का इस्तेमाल हो

     (घ) जिसमें सामासिक और तत्सम शदों की बहुलता हो

प्र.16) किस पत्रकारिता का दूरदर्शन में नया रूप स्टींग ऑपरेशन है-

     (क) खोजपरक पत्रकारिता                  (ख) विशेषीकृत पत्रकारिता

     (ग) वॉचडॉग पत्रकारिता                    (घ) एडवोकेसी पत्रकारिताा




प्र.17) टीवी खबर का वॉयस ओवर लिखते समय उसमें शॉट के मुताबिक जिन ध्वनियों यानी प्राकृतिक आवाजों   

     के लिए स्थान देना होता है, उन्हें कहते हैं- 

     (क)  एंकर-बाइट                        (ख) नेट या नेट साउंड       

     (ग) लाइव                              (घ) एंकर-विजुअल

प्र.18) इंटरनेट का प्रथम बार प्रयोग कब और कहां हुआ?

     (क) 1967 जापान में                      (ख) 1995 भारत में         

     (ग) 1969 अमेरिका में                     (घ) 1965 ब्रिटेन में

प्र.19) पाठक किस पृष्ठ को पढ़कर अपनी अवधारणा बनाते हैं-

     (क) समाचार-पत्र के समाचारों द्वारा         (ख) संपादकीय द्वारा

     (ग) समाचार-पत्र की साज-सज्जा द्वारा      (घ) समाचार-पत्र के विज्ञापनों द्वारा

प्र.20) इंटरनेट पत्रकारिता आजकल बहुत लोकप्रिय है क्योंकि-

     (क) इसमें दृश्य एवं श्रव्य दोनों माध्यमों का लाभ मिलता है।

     (ख) इसमें खबरें बहुत तीव्र गति से पहुँचती हैं।

     (ग) इसमें खबरों की पुष्टि तत्काल होती है।

     (घ) इसमें न केवल खबरों का संप्रेषण, पुष्टि, सत्यापन होता है बल्कि खबरों के बैकग्राउंडर तैयार करने में 

         तत्काल सहायता मिलती है। 

प्र.21) किस पत्रकारिता का मुख्य उत्तरदायित्व सरकार के कामकाज पर निगाह रखना होता है-

     (क) खोजपरक पत्रकारिता                  (ख) वॉचडॉग पत्रकारिता           

     (ग) एडवोकेसी पत्रकारिता                  (घ) विशेषीकृत पत्रकारिता

प्र.22) छः ककार या 5ॅ-1भ् का सिद्धांत किसने प्रतिपादित किया-

     (क) विल्बर श्रैम                          (ख) ऑगस्ट हिक्क            

     (ग) रूडियार्ड किपलिंग                    (घ) एडविन शूमैन

प्र.23) प्रथम समाचार-पत्र ‘द रिलेशन’ जर्मन भाषा में कब प्रकाशित किया गया-

     (क) 1702ई.                              (ख) 1826ई.       

     (ग) 1867ई.                              (घ) 1605ई.




प्र.24) भारत में स्वतंत्र रेडियो स्टेशन की स्थापना किस देशी रियासत ने की-

      (क) ग्वालियर रियासत                    (ख) मैसूर रियासत         

      (ग) बड़ौदा रियासत                      (घ) हैदराबाद रियासत

प्र.25) आधुनिक मुद्रण कला (प्रिटिंग प्रेस) के आविष्कारक कौन थे-

      (क) जोहान गुटेनबर्ग                     (ख) रूडियार्ड किपलिंग            

      (ग) जोहान कैरोलस                      (घ) जी. मारकोनी

प्र.26) राष्ट्रीय प्रेस दिवस (छंजपवदंस च्तमेे क्ंल) प्रतिवर्ष मनाया जाता है-

      (क) 11 जुलाई                          (ख) 30 मई             

      (ग) 11 नवबंर                           (घ) 16 नवबंर

प्र.27) संपादकीय पृष्ठ किसे कहते हैं-

     (क) मृख पृष्ठ                            (ख) राष्ट्रीय समाचारों का पृष्ठ                    

     (ग) स्तंभ लेख, विशेष लेख तथा संपादक के नाम पत्रों को छापने वाला पृष्ठ               

     (घ) अंतर्राष्ट्रीय समाचारों का प्रमुख रूप से छापने वाला पृष्ठ

प्र.28) ऑल इंडिया रेडियों की स्थापना कब हुई-

     (क) 1926 ई.                            (ख) 1936 ई.             

     (ग) 1946 ई.                             (घ) 1956 ई


प्र.29) कौन आजादी के बाद का प्रमुख पत्रकार हैं-

     (क) मदनमोहन मालवीय                   (ख) बालमुकुंद गुप्त             

     (ग) गणेश शंकर विद्यार्थी                   (घ) धर्मवीर भारती

प्र.30) संपादक का कार्य नहीं है-

     (क) समाचार की भाषा-शैली का निरीक्षण करना (ख) समाचार एकत्रित करना             

     (ग) समाचारों को वरीयता प्रदान करना         (घ) समाचार की अशुद्धियों को दूर करना

प्र.31) ‘इन्फ़ोटेनमेंट‘ पत्रकारिता में किसे कहते हैं-

     (क) मनोरंजन को                         (ख) रोजनामचा को            

     (ग) सूचनारंजन को                       (घ) सूचना संप्रेेषण को

प्र.32) किस पत्रिका का संबंध महात्मा गांधी से नहीं है-

     (क) नवजीवन                           (ख) लीडर      

     (ग) यंग इंडिया                          (घ) इंडियन ओपेनियन

प्र.33) किस पत्रकारिता में टीवी के लिए स्टिंग ऑपरेशन किया जाता है-

     (क) वैकल्पिक पत्रकारिता                  (ख) वॉचडॉग पत्रकारिता           

     (ग) एडवोकेसी पत्रकारिता                  (घ) खोजपरक पत्रकारिता                    


प्र.34) फीचर लेखन की विधा मानी जाती है-

     (क) विषय प्रधान                         (ख) समस्या प्रधान

     (ग) व्यक्ति प्रधान                         (घ) पात्र प्रधान

प्र.35) रेडियो में किस प्रकार की भाषा का प्रयोग होता है-

     (क) साहित्यिक भाषा                      (ख) चित्रभाषा             

     (ग) बोलचाल की भाषा                     (घ) परिनिष्ठित/परिमाजर््िात भाषा

प्र.36) पत्रकारिता का भविष्य किस बात पर आधारित बताया गया है-

     (क) समाचार-पत्रों की साज-सज्जित सफाई पर 

     (ख) सनसनीखेज अपराधिक घटनाओं को छापने पर

     (ग) फिल्मी सितारों के चटपटे समाचार व उनकी चरि. लीलाओं को छापने पर

     (घ) संपादकों की ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और स्वाधीनता की भावना पर

प्र.37) ’हेड लाइन’ का क्या अर्थ है-

     (क) आमुख                              (ख) मुख पृष्ठ की प्रथम पंक्ति

     (ग) मुख्यांश                              (घ) क्रेडिट लाइन

प्र.38) लोकमान्य तिलक द्वारा संपादित पत्रिका थी-

     (क) केसरी                              (ख) प्रताप            

     (ग) यंग इंडिया                           (घ) सरस्वती

प्र.39) ‘इंट्रो’ शब्द किसका संक्षिप्त रूप है-

     (क)  समाचार                            (ख) इंफार्मेशन           

     (ग) इंट्रोडक्शन                           (घ) शीर्षक

प्र.40) एक चित्र कितने शब्दों के बराबर होता है-

     (क) एक हजार                           (ख) तीन हजार             

     (ग) पाँच हजार                           (घ) दस हजार




प्र.41) विज्ञापन में किस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया जाता है-

     (क) शुद्ध हिंदी                           (ख) व्यावहारिक             

     (ग) अंग्रेजी मिश्रित शुद्ध हिंदी               (घ) शब्दकोश आधारित

प्र.42) भारत में सबसे पहला टेलीविजन समाचार बुलेटिन प्रसारित हुआ?

      (क) 15 अगस्त 1945                     (ख) 15 अगस्त 1954         

      (ग) 15 अगस्त 1956                     (घ) 15 अगस्त 1965

प्र.43) समाचार की प्रारंभिक पंक्ति या पंक्तियाँ कहलाती हैं-

      (क) इण्ट्रो                              (ख) बाइ लाइन

      (ग) इनसैट                             (घ) फोलोअप

प्र.44) फीचर में शब्दों की कमी की पूर्ति कैसे की जाती है-

     (क) कलाकारी से                         (ख) संगीतात्मकता से             

     (ग) छायाकारी से                         (घ) पॉज से

प्र.45) संपादकीय लेखन के लिए आप निम्न बातों में से किसे वरीयता देते हैं-

     (क) अतिवादी लेखन          (ख) आलोचनात्मक लेखन            (ग) स्वच्छंद निर्भीक युक्त लेखन

     (घ) समाचार-पत्र की आत्मा और व्यक्तित्व को ओजस्वी रूप में प्रकट करने वाला चिंतन

प्र.46) किस रिेपोर्ट में सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध तथ्यों, सूचनाओं और आँकड़ों की गहरी छानबीन करके  

      उसके आधार पर किसी घटना, समस्या या मुद्दे से जुड़े पहलुओं को सामने लाया जाता है-

     (क) खोजी रिपोर्ट में                      (ख) इन-डेप्थ रिपोर्ट में

     (ग) विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में                (घ) विवरणात्मक रिपोर्ट में

प्र.47) किस लेखन में नए लेखकों को मौका नहीं मिलता है-

     (क) स्तंभ लेखन में                       (ख) विशेष रिपोर्ट लेखन में

     (ग) आलेख लेखन में                      (घ) फीचर लेखन में

प्र.48) कौन नाटक का भाग नहीं है-   

     (क) दृश्य                               (ख) कथावस्तु

     (ग) संवाद                               (घ) वायस ओवर

प्र.49) रिपोर्ताज किस भाषा का शब्द है-

     (क) अंग्रेजी भाषा                         (ख) जर्मन भाषा

     (ग) फ्रेंच भाषा                            (घ) लैटिन भाषा

प्र.50) आकाशवाणी को समाचार प्रमुख रूप से किससे प्राप्त होता है-

     (क) दूरदर्शन से                          (ख) तार से 

     (ग) सिनेमा से                            (घ) समाचार एजेंसियों से 



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