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Saturday, 4 April 2020

E content ओम थानवी वितान

3. ओम थानवी (अतीत में दबे पाँव)

प्रश्न 1.‘सिंधु सभ्यता कि खूबी उसका सौन्दर्य-बोध है जो राज पोषित या धर्म पोषित न होकर समाज-पोषित था।’ ऐसा क्यों कहा गया? 
उत्तर. उस काल के लोगो मे कला या सुरुचि बहुत अधिक थी |जो उस काल के मनुष्यों की दैनिक प्रयोग की वस्तुओं में स्पष्ट दिखाई देती है |यथा वहाँ कि वास्तु कला तथा नियोजन धातु व पत्थर कि मूर्तियाँ ,मिट्टी के बरतन और उन पर बने चित्र वनस्पति और पशु –पक्षियो कि छवियाँ मोहरे उन पर उत्कीर्ण आकृतियाँ खिलौने केश – विन्यास आभूषण सुघड़ लिपियाँ इस सभ्यता  के सौंदर्य बोध को विकत करती है जो पूरी  तरह राज पोषित ,धर्म पोषित न हो कर समाज पोषित है | मुअनजोदड़ो की खुदाई में एक दाढ़ी वाले नरेश कि छोटी मूर्ति मिली है परन्तु यह मूर्ति किसी राजतन्त्र या धर्मतंत्र का प्रमाण नहीं कही जा सकती | सिन्धु सभ्यता की यही खूबी है कि उसका सौन्दर्यबोध जो समाज पोषित या धर्मपोषित नहीं है |
प्रश्न 2.  टूटे फूटे खंडहर, सभ्यता और संस्कृति के इतिहास केसाथ धड़कती जिंदगियों के अनछुए समयों का भी दस्तावेज़ होते हैं –इस कथन का भाव स्पष्ट कीजिए |
उत्तर.i. पूरा अवशेष उस संस्कृति कि रहन सहन व्यवस्था केसाथ ही उन पूर्वजोके जीवन संदर्भों से परिचित कराती है |
ii. हम कल्पना केसहारे उस समय मे प्रवेश कर उस काल खंड कि अनुभूति प्राप्त ​    करते है|
iii. खंडहरों से उस सभ्यता की प्रामाणिकता सिद्ध होती है |
प्रश्न 3. अतीत मे दबे पाँव में वर्णित महाकुंड का वर्णन कीजिए –
उत्तर :- मोहन –जो दड़ो मे प्राप्त महाकुंड कि लंबाई 40 फुट ,चौड़ाई 25 फुट तथा गहराई 7 फुट है | कुंड मे उत्तर –दक्षिण से सीढ़ियाँ उतरती है | इसमे आठ स्नानागार हैं यह सिंधु गति सभ्यता के अदवितया वासतौ कौशल का अनुपम उदाहरण है कुंड के तीन तरफ साधुओं के कक्ष कुंड के ताल और दीवारों पर पक्की ईंटों के बीच में छूने और चिरोडी के गारे का इस्तेमाल हुआ है कुंड में पानी ले जाने और निकालने की व्यवस्था है। इस कुंड को पवित्र मानते हुए आनुष्ठानिक कार्यों में इसके जल का इस्तेमाल होता था।
प्रश्न 4. सिन्धु सभ्यता साधन सम्पन्न थी पर उसमें भव्यता का आडम्बर नहीं था- प्रस्तुत कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं ?
उत्तर :- दूसरी सभ्यताएं राजतन्त्र और धर्म तंत्र द्वारा संचालित थी | वहां बड़े-बड़े सुन्दर महल, पूजा स्थल, भव्य मूर्तियाँ, पिरामिड और मंदिर मिले हैं |राजाओं, धर्मगुरुओं की समाधियाँ भी मिली हैं | ये सभ्यताएं एक साधन संपन्न सभ्यता थी किन्तु उसमें राजसत्ता या धर्मसत्ता के चिह्न नहीं मिलते | वहाँ की नगर योजना, वास्तुकला, मुहरें, ठप्पों, जल व्यवस्था, साफ़ सफाई और सामाजिक व्यवस्था आदि की एकरूपता में अनुशासन देखा जाता है |खुदाई में छोटी छोटी मूर्तियाँ, खिलौने, मृदभांड, नावें आदि मिली हैं इस प्रकार स्पष्ट है कि सिन्धु सभ्यता संपन्न थी परन्तु उसमें भव्यता का आडम्बर नहीं था |
प्रश्न 5. क्या सिन्धु सभ्यता को जल संस्कृति कहा जा सकता है ?
उत्तर :- सिन्धु सभ्यता एक जल संस्कृत थी | प्रत्येक घर में एक स्नानागार था | घर के भीतर का पानी नालियों के माध्यम से हौदी में आता था फिर बड़ी नालियों में जाता था | नालियाँ ऊपर से ढकी रहती थी |जल निकासी का प्रबंध था | नगर में कुओं का भी प्रबंध था |ये कुएँ पक्की ईंट से बने थे | यह सभ्यता विश्व में पहली जल संस्कृति है जो कुएँ खोदकर भू-जल तक पहुँचे |मुअनजोदड़ो में सात-सौ कुएँ थे | यहाँ का महाकुंड लगभग 40 फीट लम्बा 25 फीट चौड़ा था | इस प्रकार पानी की व्यवस्था सभ्य समाज की पहचान है |
प्रश्न 6.  मुअनजोदड़ो की गृह निर्माण योजना पर संक्षिप्त में प्रकाश डालिए ?
​उत्तर:- नगर कि मुख्य सड़क के दोनों ओर घर हैं, परन्तु किसी भी घर का मुख्यद्वार सड़क पर ​नहीं खुलता | घर जाने के लिए मुख्य सड़क से गलियों में जाना पड़ता है |सभी घरों में जल ​निकासी की व्यवस्था है | घर पक्की ईंटों के बने हैं | छोटे घरों में खिड़कियाँ नहीं हैं परन्तु बड़े ​दुर्गों में खिड़कियाँ एवं रोशनदान बने हुए हैं | सब घर कतार में बने हैं | नगर में बस्तियों की ​व्यवस्था भी बड़ी ही सुंदर है | छोटे व कामगार लोगों की बस्तियाँ सिन्धु के किनारे पर बनी थी ​और बड़े लोगों की बस्तियाँ ऊपर के दुर्गों पर बनी हुई थी | देखा जाए तो इस प्रकार की नगर ​रचना आज के समय में भी दुर्लभ है |

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