केन्द्रीय विद्यालय संगठन
भुवनेश्वर संभाग
सेट-
सत्रांत-परीक्षा: (2019-20)
विषय :हिंदी (केन्द्रिक )
समय : 3 घंटे कक्षा-ग्यारहवीं पूर्णांक : 80
निर्देश : > इस प्रश्न पत्र के तीन खंड हैं – क ,ख ,ग ।
>प्रत्येक खंड के प्रश्नों के उत्तर क्रमानुसार लिखिए ।
>प्रश्न पत्र में कुल 14 प्रश्न हैं |
खंड (क)
(1) निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए - 10
भारतीय धर्मनीति के प्रणेता नैतिक मूल्यों के प्रति अधिक जागरूक थे। उनकी यह धारणा थी कि नैतिक मूल्यों का दृढ़ता से पालन किए बिना किसी भी समाज की आर्थिक व सामाजिक प्रगति की नीतियाँ प्रभावी नहीं हो सकतीं। उन्होंने उच्चकोटि की जीवन-प्रणाली के निर्माण के लिए वेद की एक ऋचा के आधार पर कहा कि उत्कृष्ट जीवन-प्रणाली मनुष्य की विवेक-बुद्ध से तभी निर्मित होनी संभव है, जब सब लोगों के संकल्प, निश्चय, अभिप्राय समान हों; सबके हृदय में समानता की भव्य भावना जाग्रत हो और सब लोग पारस्परिक सहयोग से मनोनुकूल कार्य करें। चरित्र-निर्माण की जो दिशा नीतिकारों ने निर्धारित की, वह आज भी अपने मूल रूप में मानव के लिए कल्याणकारी है। प्राय: यह देखा जाता है कि चरित्र और नैतिक मूल्यों की उपेक्षा वाणी, बाहु और उदर को संयत न रखने के कारण होती है। जो व्यक्ति इन तीनों पर नियंत्रण रखने में सफल हो जाता है, उसका चरित्र ऊँचा होता है।
सभ्यता का विकास आदर्श चरित्र से ही संभव है। जिस समाज में चरित्रवान व्यक्तियों का बाहुल्य है, वह समाज सभ्य होता है और वही उन्नत कहा जाता है। चरित्र मानव-समुदाय की अमूल्य निधि है। इसके अभाव में व्यक्ति पशुवत व्यवहार करने लगता है। आहार, निद्रा, भय आदि की वृत्ति सभी जीवों में विद्यमान रहती है, यह आचार अर्थात चरित्र की ही विशेषता है, जो मनुष्य को पशु से अलग कर, उससे ऊँचा उठा मनुष्यत्व प्रदान करती है। सामाजिक अनुशासन बनाए रखने के लिए भी चरित्र-निर्माण की आवश्यकता है। सामाजिक अनुशासन की भावना व्यक्ति में तभी जाग्रत होती है, जब वह मानव प्राणियों में ही नहीं, वरन सभी जीवधारियों में अपनी आत्मा के दर्शन करता है।
क) हमारे धर्मनीतिकार नैतिक मूल्यों के प्रति विशेष जागरूक क्यों थे?2
(ख) चरित्र मानव-जीवन की अमूल्य निधि कैसे है? स्पष्ट कीजिए।2
(ग) धर्मनीतिकारों ने उच्चकोटि की जीवन-प्रणाली के संबंध में क्या कहा?2
(घ) प्रस्तुत गद्यांश में किन पर नियंत्रण रखने की बात कही गई है और क्यों?2
(ड) ‘उत्कृष्ट’ और ‘प्रगति’ शब्द का विलोम लिखिए |1
(च) प्रस्तुत गद्यांश के लिए उपयुक्त शीर्षक दीजिए।1
(ख) चरित्र मानव-जीवन की अमूल्य निधि कैसे है? स्पष्ट कीजिए।2
(ग) धर्मनीतिकारों ने उच्चकोटि की जीवन-प्रणाली के संबंध में क्या कहा?2
(घ) प्रस्तुत गद्यांश में किन पर नियंत्रण रखने की बात कही गई है और क्यों?2
(ड) ‘उत्कृष्ट’ और ‘प्रगति’ शब्द का विलोम लिखिए |1
(च) प्रस्तुत गद्यांश के लिए उपयुक्त शीर्षक दीजिए।1
प्रश्न-2-निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए6
जीवन एक कुआँ है
अथाह-अगम
सबके लिए एक-सा वृत्ताकार!
जो भी पास जाता है,
सहज ही तृप्ति, शांति, जीवन पाता है!
मगर छिद्र होते हैं जिसके पात्र में,
रस्सी-डोर रखने के बाद भी,
हर प्रयत्न करने के बाद भी-
वह यहाँ प्यासा का प्यासा रह जाता है।
अथाह-अगम
सबके लिए एक-सा वृत्ताकार!
जो भी पास जाता है,
सहज ही तृप्ति, शांति, जीवन पाता है!
मगर छिद्र होते हैं जिसके पात्र में,
रस्सी-डोर रखने के बाद भी,
हर प्रयत्न करने के बाद भी-
वह यहाँ प्यासा का प्यासा रह जाता है।
मेरे मन! तूने भी, बार-बार
बड़ी-बड़ी रस्सियाँ बटीं
रोज-रोज कुएँ पर गया
तरह-तरह घड़े को चमकाया,
पानी में डुबाया, उतराया
लेकिन तू सदा हीप्यासा गया,
प्यासा ही आया!
और दोष तूने दिया
कभी तो कुएँ को
बड़ी-बड़ी रस्सियाँ बटीं
रोज-रोज कुएँ पर गया
तरह-तरह घड़े को चमकाया,
पानी में डुबाया, उतराया
लेकिन तू सदा हीप्यासा गया,
प्यासा ही आया!
और दोष तूने दिया
कभी तो कुएँ को
कभी पानी को
कभी सब को
मगर कभी जाँचा नहीं खुद को
परखा नहीं घड़े की तली कोचीन्हा नहीं उन असंख्य छिद्रों को
और मूढ! अब तो खुद को परख देख |
कभी सब को
मगर कभी जाँचा नहीं खुद को
परखा नहीं घड़े की तली कोचीन्हा नहीं उन असंख्य छिद्रों को
और मूढ! अब तो खुद को परख देख |
(1) कविता में जीवन को कुआँ क्यों कहा गया है कैसा व्यक्ति कुएँ के पास जाकर भी प्यासा रह जाता है ?
(ख) कवि का मन सभी प्रकार के प्रयासों के उपरांत भी प्यासा क्यों रह जाता है?
(ग) किन पंक्तियों का आशय है-हम अपनी असफलताओं के लिए दूसरों को दोषी मानते हैं?
(घ) यदि किसी को असफलता प्राप्त हो रही हो तो उसे किन बातों की जाँच-परख करनी चाहिए?
(ङ) पात्र में छिद्र होने का आशय क्या है?
(ख) कवि का मन सभी प्रकार के प्रयासों के उपरांत भी प्यासा क्यों रह जाता है?
(ग) किन पंक्तियों का आशय है-हम अपनी असफलताओं के लिए दूसरों को दोषी मानते हैं?
(घ) यदि किसी को असफलता प्राप्त हो रही हो तो उसे किन बातों की जाँच-परख करनी चाहिए?
(ङ) पात्र में छिद्र होने का आशय क्या है?
(च) ‘मूढ’ शब्द का अर्थ स्पष्ट कीजिए ?
अथवा
पुरुष हो पुरुषार्थ करो, उठो।
पुरुष क्या, पुरुषार्थी हुआ न जो,
हृदय की सब दुर्बलता तजो।
प्रबल जो तुम में पुरुषार्थ हो,
सुलभ कौन तुम्हें न पदार्थ हो?
प्रगति के पथ में विचरो उठो,
पुरुष हो, पुरुषार्थ करो, उठो।
पुरुष क्या, पुरुषार्थी हुआ न जो,
हृदय की सब दुर्बलता तजो।
प्रबल जो तुम में पुरुषार्थ हो,
सुलभ कौन तुम्हें न पदार्थ हो?
प्रगति के पथ में विचरो उठो,
पुरुष हो, पुरुषार्थ करो, उठो।
न पुरुषार्थ बिना कुछ स्वार्थ है,
न पुरुषार्थ बिना परमार्थ है।
समझ लो यह बात यथार्थ है
कि पुरुषार्थ ही पुरुषार्थ है।
भुवन में सुख-शांति भरो, उठो।
पुरुष हो पुरुषार्थ करो, उठो।
न पुरुषार्थ बिना परमार्थ है।
समझ लो यह बात यथार्थ है
कि पुरुषार्थ ही पुरुषार्थ है।
भुवन में सुख-शांति भरो, उठो।
पुरुष हो पुरुषार्थ करो, उठो।
न पुरुषार्थ बिना वह स्वर्ग है,
न पुरुषार्थ बिना अपवर्ग है।
न पुरुषार्थ बिना अपवर्ग है।
न पुरुषार्थ बिना क्रियता कहीं,
न पुरुषार्थ बिना प्रियता कहीं।
सफलता वर-तुल्य वरो, उठो
पुरुष हो पुरुषार्थ करो, उठो।
जिसमें कुछ पौरुष हो यहाँ
सफलता वह पा सकता कहाँ?
अपुरुषार्थ भयंकर पाप है,
न उसमें यश है, न प्रताप है।
न कृमि-कीट समान मरो, उठो
पुरुष हो, पुरुषार्थ करो, उठो|
न पुरुषार्थ बिना प्रियता कहीं।
सफलता वर-तुल्य वरो, उठो
पुरुष हो पुरुषार्थ करो, उठो।
जिसमें कुछ पौरुष हो यहाँ
सफलता वह पा सकता कहाँ?
अपुरुषार्थ भयंकर पाप है,
न उसमें यश है, न प्रताप है।
न कृमि-कीट समान मरो, उठो
पुरुष हो, पुरुषार्थ करो, उठो|
(क) प्रथम काव्यांश के माध्यम से कवि ने मनुष्य को क्या प्रेरणा दी है?
(ख) मनुष्य पुरुषार्थ से क्या-क्या कर सकता है?
(ग) ‘सफलता वर-तुल्य वरो उठो’-पंक्ति का अर्थ स्पष्ट करें।
(घ) अपुरुषार्थ भयंकर पाप है-कैसे?
(ङ) काव्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए
(ख) मनुष्य पुरुषार्थ से क्या-क्या कर सकता है?
(ग) ‘सफलता वर-तुल्य वरो उठो’-पंक्ति का अर्थ स्पष्ट करें।
(घ) अपुरुषार्थ भयंकर पाप है-कैसे?
(ङ) काव्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए
(च)’पुरुषार्थ” का अर्थ स्पष्ट कीजिए|
खंड-ख
3. विद्यालय में हुए “विज्ञान प्रदर्शनी” पर दृश्य लेख लिखिए |
अथवा
‘फिल्मों में हिंसा’ विषय पर एक आलेख तैयार कीजिए | 5
अथवा
विद्यालय में हुए “विज्ञान प्रदर्शनी”पर दृश्य लेख लिखिए |
“तनाव मुक्त जीवन कैसे जिएँ” या “गिरते मानवीय मूल्य” पर फीचर लिखिए
अथवा
4. दूरदर्शन के महानिदेशक को दूरदर्शन के कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए एक पत्र लिखिए । 5
अथवा
अपने नगर के महापौर को एक पत्र लिखकर नगर में नियमित एवं अपर्याप्त जल वितरण से होने वाली असुविधाओं के प्रति उनका ध्यान आकर्षित कीजिए |
5.आपके विद्यालय में हुए वार्षिकोत्सव पर प्रतिवेदन तैयार कीजिए
अथवा
आपके विद्यालय में हुए पुरस्कार वितरण समारोह का कार्यवृत तैयार कीजिये 3
6. निम्नलिखित सभी प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखो - 1x4=4
(क) फीडबैक किसे कहते हैं??
(ख) शोर क्या है?
(ग) भारत में छपने वाला पहला अखबार कौन-सा था?
(घ) वॉचडॉग पत्रकारिता क्या है?
7. पत्थर,कछुआ,अनार,अंगूर,औरत,आप शब्दों को शब्द कोश में किस क्रम में लिखा जाएगा?3
अथवा शब्द कोश का अर्थ बताते हुए उसकी दो विशेषताएँ लिखिए |
खंड–ग
8. निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए – 2x3 =6
मेहनत की लूट सबसे खतरनाक नहीं होती
पुलिस की मार सबसे खतरनाक नहीं होती
गद्दारी-लोभ की मुट्ठी सबसे खतरनाक नहीं होती
बैठे-बिठाए पकड़ जाना-बुरा तो हैं
सहमी-सी चुप में जकड़ जाना-बुरा तो है
पर सबसे खतरनाक नहीं होता कपट के शर में सही होते हुए भी दब जाना-बुरा तो है
किसी जुगनू की ली में पढ़ना-बुरा तो है
मुट्टियाँ भींचकर बस वक्त निकाल लेना-बुरा तो हैं
सबसे खतरनाक नहीं होता
पुलिस की मार सबसे खतरनाक नहीं होती
गद्दारी-लोभ की मुट्ठी सबसे खतरनाक नहीं होती
बैठे-बिठाए पकड़ जाना-बुरा तो हैं
सहमी-सी चुप में जकड़ जाना-बुरा तो है
पर सबसे खतरनाक नहीं होता कपट के शर में सही होते हुए भी दब जाना-बुरा तो है
किसी जुगनू की ली में पढ़ना-बुरा तो है
मुट्टियाँ भींचकर बस वक्त निकाल लेना-बुरा तो हैं
सबसे खतरनाक नहीं होता
(क)‘सबसे खतरनाक नहीं होती’-वाक्यांश की आवृत्ति से कवि क्या कहना चाहता है?
(ख)कवि ने किन-किन खतरनाक स्थितियों का उल्लेख किया है?
(ग)‘किसी जुगनू की लौ में पढ़ना’-आशय स्पष्ट कीजिए।
चंपा कहती है:
तुम कागद ही गोदा करते ही दिन भर
क्या यह काम बहुत अच्छा है
यह सुनकर मैं हँस देता हूँ
फिर चंपा चुप हो जाती है
चंपा ने यह कहा कि
मैं तो नहीं पढूँगी
तुम तो कहते थे गाँधी बाबा अच्छे हैं
तुम कागद ही गोदा करते ही दिन भर
क्या यह काम बहुत अच्छा है
यह सुनकर मैं हँस देता हूँ
फिर चंपा चुप हो जाती है
चंपा ने यह कहा कि
मैं तो नहीं पढूँगी
तुम तो कहते थे गाँधी बाबा अच्छे हैं
उस दिन चंपा आई, मैंने कहा कि
चंपा, तुम भी पढ़ लो
हारे गाढ़ काम सरेगा
गाँधी बाबा की इच्छा है
सब जन पढ़ना-लिखना सीखें
वे पढ़ने लिखने की कैसे बात कहेंगे
मैं तो नहीं पढूँगी
चंपा, तुम भी पढ़ लो
हारे गाढ़ काम सरेगा
गाँधी बाबा की इच्छा है
सब जन पढ़ना-लिखना सीखें
वे पढ़ने लिखने की कैसे बात कहेंगे
मैं तो नहीं पढूँगी
(क)चंपा कवि से क्या प्रश्न करती है?
(ख)कवि ने चंपा को क्या सीख दी तथा क्यों?
(ग)कवि ने गाँधी का नाम क्यों लिया?
9. निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए – 2x3=6
पग धुंधरू बाधि मीरा नाची,
मैं तो मेरे नारायण सू, आपहि हो गई साची
लोग कहैं, मीरा भई बावरी, न्यात कहै कुल-नासी
विस का प्याला राणा भंज्या, पीवत मीरा हँसी
मीरां के प्रभु गिरधर नागर, सहज मिल अविनासी
मैं तो मेरे नारायण सू, आपहि हो गई साची
लोग कहैं, मीरा भई बावरी, न्यात कहै कुल-नासी
विस का प्याला राणा भंज्या, पीवत मीरा हँसी
मीरां के प्रभु गिरधर नागर, सहज मिल अविनासी
(क) उपरोक्त काव्यांश का भाव–सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए |
(ख) उपरोक्त काव्यांश का शिल्प–सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए |
अथवा
ठंडी होती दिनचर्या में
जीवन की गर्माहट
मन का हरापन
जीवन की गर्माहट
मन का हरापन
भोलापन दिल का
अक्खड़पन, जुझारूपन भी
अक्खड़पन, जुझारूपन भी
(क) उपरोक्त काव्यांश का भाव–सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए |
(ख) उपरोक्त काव्यांश का शिल्प–सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए |
10 . निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो के उत्तर दीजिए – 2x2=4
(क) कबीर ने ऐसा क्यों कहा है कि संसार बौरा गया है ?
(ख) ‘ओ चराचर! मत चूक अवसर’- इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
(ग) चंपा ने ऐसा क्यों कहा कि कलकत्ता पर बजर गिरे ?
11. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए – 7
हार्टिकल्चर डिपार्टमेंट का सेक्रेटरी साहित्य प्रेमी आदमी जान पड़ता था। उसने लिखा था –आश्चर्य है, इस समय जब हम पेड़ लगाओ स्कीम ऊंचे स्तर पर चला रहे हैं, हमारे देश में ऐसे सरकारी अफसर मौजूद हैं, जो पेड़ों को काटने का सुझाव देते हैं, और वह भी एक फलदार पेड़ को और वह भी जामुन के पेड़ को, जिसके फल जनता बड़े चाव से खाती है। हमारा विभाग किसी हालत में इस फलदार वृक्ष को काटने की इजाजत नहीं दे सकता ।
(क) हार्टिकल्चर डिपार्टमेंट की क्या टिप्पणी थी ? 2
(ख) उपर्युक्त विभाग किस बात की इजाजत नहीं दे सकता ? 2
(ग) उपर्युक्त गद्यांश से किस मनोवृत्ति का पता चलता है ? 2
(घ)उपर्युक्त गदयांश किस अध्याय का अंश है ?लेखक/लेखिका कौन हैं?1
12. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन के उत्तर दीजिए – 3x3=9
(क) मियां नसीरुद्दीन को नानबाइयों का मसीहा क्यों कहा गया है ?
(ख स्पीति में बारिश का वर्णन एक अलग तरीके से किया गया है। आप अपने यहाँ होने वाली बारिश का वर्णन कीजिए।
(ग) ‘नमक का दरोगा’ कहानी ‘धन पर धर्म की विजय’ की कहानी है। प्रमाण दवारा स्पष्ट’कीजिए।
(घ) आपकी दृष्टि में भारत माता और हिंदुस्तान की क्या संकल्पना है?स्पष्ट कीजिए |
13. चेजारो के साथ गाँव-समाज के व्यवहार में पहले की तुलना में अब क्या फर्क आया है? पाठ के आधार पर बताइए?
अथवा
लेखक ने लता की गायकी की किन विशेषताओं को उजागर किया है? आपको लता की गायकी में कौन-सी विशेषताएँ नजर आती हैं? उदाहरण सहित बताइए।4
14. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो के उत्तर दीजिए – 4+4=8
(क) अपने परिवार से लेकर तातुश के घर तक के सफ़र में बेबी के सामने रिश्तोंकी कौन सी सच्चाई उजागर होती है?
(ख) ‘आलो-आँधारि’ रचना बेबी की व्यक्तिगत समस्याओं के साथ-साथ कई सामाजिक मददों को समेटे है। किन्हीं दो मुख्य समस्याओं पर अपने विचार प्रकट कीजिए।
(ग) चित्रपट संगीत दिनोदिन क्यों विकसित होता चला जा रहा है?
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